सीबीआई ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक एवं एयू बैंक से जुड़े 661 करोड़ रुपये के गबन मामले में कई जगहों पर की छापेमारी

सीबीआई ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक एवं एयू बैंक से जुड़े 661 करोड़ रुपये के गबन मामले में कई जगहों पर की छापेमारी

नयी दिल्ली, 07 जून। केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू फाइनेंस बैंक से जुड़े 661 करोड़ रुपये के सरकारी धन के गबन के मामले में रविवार को चंडीगढ़, पंचकूला और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में छह स्थानों पर छापेमारी की।

यह छापेमारी हरियाणा सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और नोएडा स्थित विपम कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड और उसके निदेशक के परिसरों को निशाना बनाकर की गई। जांचकर्ताओं को संदेह है कि सरकारी कर्मचारियों और बैंक अधिकारियों ने आपस में साठगांठ करके खाते खोले, सरकारी धन हस्तांतरित किया और अवैध लाभ के लिए उस पैसे को दूसरी जगह भेज दिया।

सीबीआई के अनुसार, इस धोखाधड़ी से हरियाणा सरकार के आठ विभागों और चंडीगढ़ केंद्र शासित प्रदेश के दो विभागों – नगर निगम चंडीगढ़ और क्रेस्ट चंडीगढ़ पर असर पड़ा है। एजेंसी का आरोप है कि बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से एक सुनियोजित साजिश के तहत सरकारी धन का गबन किया गया।

तलाशी के दौरान, सीबीआई ने आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और संपत्ति से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए हैं। जांचकर्ताओं को ऐसे सबूत भी मिले हैं जिनसे पता चलता है कि विपम कंसल्टेंसी को इस अपराध से कमाई की रकम मिली थी, जिसे बाद में उसके निदेशक के निजी खाते में स्थानांतरित कर दिया गया था।

सीबीआई ने पंचकूला की विशेष अदालत के समक्ष अपनी पहली चार्जशीट पहले ही दाखिल कर दी है, जिसमें हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के अधिकारियों की कथित भूमिका का विवरण दिया गया है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस मामले में और भी आरोप पत्र दाखिल किए जाने की उम्मीद है।

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