
नयी दिल्ली, 7 जून। देश में पेट्रोलियम उत्पादों के दामों में बढ़ोतरी की आलोचनाओं के बीच सरकार ने रविवार को सफाई दी कि भारतीय परिवारों को आज भी पड़ोसी देशों की तुलना में रसोई गैस (एलपीजी) कहीं सस्ती दर पर उपलब्ध करायी जा रही है और पश्चिम एशिया के संकट के बावजूद गैस की कमी नहीं होने दी गयी है।
गौरतलब है कि फरवरी के अंत में ईरान युद्ध छिड़ने के बाद भारत में पश्चिम एशिया से ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई है, साथ ही वैश्विक बाजार में कच्चे तेल के भावों में भी उछाल आया है जबकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए करीब 80 प्रतिशत आयात पर निर्भर है। सरकारी पेट्रोलियम कंपनियों के घाटे को कम करने के लिए हाल में मोटर वाहन ईंधन पर उत्पाद शुल्क में छूट देने के साथ ही घरेलू और वाणिज्यिक एलपीजी गैस के दामों में वृद्धि की है।
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि इस समय 14.2 किलो के एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति लागत बढ़कर 1,600 रूपये से अधिक हो गई है फिर भी सरकार इसे ग्राहकों को लागत से काफी कम मूल्य पर उपलब्ध कराना जारी रखे हुए है।
मंत्रालय ने कहा है कि भारत में रसाईं गैस के भाव अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया तथा कनाडा जैसे विकसित अर्थव्यवस्था वाले देशों की कीमतों से काफी कम है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना(पीएमयूवाई) के एक लाभार्थी को 14.2 किलोग्राम के एक सिलेंडर के लिए प्रभावी रूप से 642 रुपये का भुगतान करना पड़ता है जबकि दिल्ली में एक सामान्य उपभोक्ता को गैस सिलेंडर 942 रुपये में मिलता है।
मंत्रालय ने कहा है कि गरीबों को भारत में 642 रुपये के सिलेंडर के विपरीत पाकिस्तान में यही गैस 1,046 रुपये (लगभग 39 प्रतिशत महंगी), नेपाल में 1,207 रुपये (लगभग 47 प्रतिशत अधिक), बांग्लादेश . 1,225 रुपये (लगभग 48 प्रतिशत अधिक), श्रीलंका 1,241 रुपये ( लगभग 48 प्रतिशत), अमेरिका लगभग 1,755 रुपये लगभग (63 प्रतिशत) , ऑस्ट्रलिया लगभग. 1,765
( 64 प्रतिशत) और कनाडा में यही गैस लगभग. 2,411 रुपये (लगभग 73 प्रतिशत) महंगी है।
पीएम उज्ज्वला योजना में 10.58 करोड़ कनेक्शन दिये गये हैं।
मंत्रालय ने कहा है कि सरकार घरेलू एलपीजी के लिए उपभोक्ता को मिलने वाली प्रभावी कीमत को नियंत्रित करना जारी रखे हुए है। कोई भी परिवार 942 की दर पर अपनी जरूरत के हिसाब से सिलेंडर खरीद सकता है। उज्ज्वला योजना(पीएमयूवाई) के लाभार्थी को, हरेक वर्ष पहले चार रिफिल पर 300 रुपये प्रति सिलेंडर का प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण(डीबीटी) मिलेगा— जो कि एक सामान्य उज्ज्वला परिवार की औसत वार्षिक खपत(लगभग चार रिफिल प्रति वर्ष) के बराबर है ।
इस तरह वे उन रिफिल के लिए प्रभावी रूप से 642 रुपये का भुगतान करते हैं; यह सहायता अपरिवर्तित है।
मंत्रालय का कहना है कि हरेक गैस सिलेंडर पर जो कई सौ रुपये का अतिरिक्त खर्च आता है, उसका भार आम परिवारों पर नहीं डाला गया है।
भारत में उपयोग होने वाले एलपीजी को 50:50 प्रोपेन-ब्यूटेन मिश्रण के रूप में लें तोे इसके लिए सऊदी एलपीजी की कीमत फरवरी में ईरान युद्ध से पहले लगभग 543 अमेरिकी डॉलर प्रति टन थी। लड़ाई से होर्मुज़ जलडमरूमध्य के बंद होने के बाद, अप्रैल आपूर्ति के अनुबंधों का भाव 775 अमेरिकी डॉलर प्रति टन हो गया। इसमें प्रोपेन 750 डॉलर और ब्यूटेन 800 डॉलर प्रति टन था। इसके बाद यह जून में भाव लगभग 790 अमेरिकी डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया। इस प्रकार, एलपीजी के मानक अंतराष्ट्री भाव में फरवरी के अंत में उत्पन्न् संकट से पहले की तुलना में लगभग 46 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
रसोईं गैस के भाव उचित स्तर पर बनाए रखने के कारण सरकारी कंपनियों को वर्ष 2024-25 घरेलू एलपीजी की कीमतों पर कुल मिलाकर 41,338 करोड़ रुपये और 2025-26 में 60,0000 करोड़़ रुपये का घाटा हुआ था। यह घाटा कंपनियां और सरकार मिल कर वहन करती हैं। सरकार ने वित वर्ष 2025-26 के लिए पेट्रोलियम कंपनियों को एलपीजी पर क्षतिपूर्ति के लिए 30,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि आपूर्ति संकट के दौरान भी भारत ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से आपूर्ति जारी रखा और किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कमी नहीं हुई। कुल मिलाकर, सरकार ने वैश्विक कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद लंबे समय से सबसे कम कीमत पर रसोई गैस की आपूर्ति सुनिश्चित कर रखा है।पेट्रोलियम उत्पादों के दामों में वृद्धि को लेकर कांग्रेस ओर दूसरे विपक्षी दल सरकार पर हमलावर हैं। उनका आरोप है कि अपूर्ति संकट को सही तरह से संभालने में सरकार नाकाम रही है।