विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा में लगातार पांचवें दिन नहीं हो सका प्रश्नकाल

विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण राज्यसभा में लगातार पांचवें दिन नहीं हो सका प्रश्नकाल

नयी दिल्ली 24 जुलाई । शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे विपक्षी सदस्यों के हंगामे के कारण शुक्रवार को राज्यसभा में लगातार पांचवें दिन प्रश्नकाल नहीं हो सका और सदन की कार्यवाही दोपहर बाद दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी।इससे पहले, इसी मुद्दे पर विपक्ष के हंगामे के कारण सदन में शून्यकाल भी नहीं हो सका था। संसद के मौजूदा मानसून सत्र का आज पांचवां दिन है और अब तक सदन में कोई कामकाज नहीं हो सका है।

एक बार के स्थगन के बाद दोपहर 12 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई विपक्षी सदस्य खड़े होकर हंगामा करने लगे। सदन में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सभापति सी.पी. राधाकृष्णन से अपनी बात रखने की अनुमति चाही। इस पर सभापति ने कहा, “आपके अपने ही सदस्य अपनी सीट पर नहीं बैठ रहे हैं, ऐसे में मैं क्या कर सकता हूं।”इसके बाद जैसे ही श्री खरगे ने बोलना शुरू किया सत्तापक्ष के सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया। सभापति ने हाथ के इशारे से उन्हें शांत रहने के लिए कहा। दोनों पक्षों की तरफ से भारी शोर-शराबे के बीच श्री खरगे ने कहा, “मैं आपके संज्ञान में लाना चाहता हूं कि सबसे पहले शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए और प्रधानमंत्री को (संसद में) आकर बयान देना चाहिए। उसके बाद हम चर्चा करेंगे।” उनके इतना कहते ही श्री राधाकृष्णन ने सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

इससे पहले सुबह 11 बजे भी श्री प्रधान के इस्तीफे और नीट यूजी पेपर लीक के मुद्दे पर चर्चा कराने की मांगों को लेकर विपक्ष ने हंगामा किया जिसके कारण शून्यकाल नहीं हो सका। सभापति ने विधायी दस्तावेज सदन के पटल पर रखे जाने के बाद जैसे ही शून्यकाल की कार्यवाही शुरू करनी चाही विपक्ष के सदस्यों ने नीट पेपर लीक का मुद्दा उठाने की कोशिश की।श्री राधाकृष्णन ने श्री खरगे से अपनी बात रखने को कहा। श्री खरगे ने कहा कि सोमवार को जिस तरह नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया वह बहुत दर्दनाक है। उनकी बात पूरी भी नहीं हो सकी उससे पहले ही सभापति ने सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

इससे पहले सभापति ने कारगिल की चोटियों से पाकिस्तान समर्थित घुसपैठियों को खदेड़ने के भारतीय सेनाओं के पराक्रम की याद में हर साल 26 जुलाई को मनाये जाने वाले विजय दिवस का उल्लेख किया। उन्होंने सदन से मातृभूमि की रक्षा में प्राणों का बलिदान देने वाले रणबांकुरों की वीरता और साहस को सलाम करने की अपील की। सदन ने करगिल के वीरों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके सम्मान में दो मिनट का मौन रखा।

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