
नयी दिल्ली 07 सितम्बर । रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि सेनाओं को खतरों का निर्णायक जवाब देने की पूरी आजादी और संसाधन दिये गये हैं, जिसमें जरूरत पड़ने पर दुश्मन के इलाके में कार्रवाई भी शामिल है।रक्षा मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि श्री सिंह ने यहां एक कार्यक्रम में कहा कि जम्मू-कश्मीर में युवाओं को भटकाने, भारत विरोधी गतिविधियों के लिए धन देने, हिंसा-आतंक फैलाने और समाज में फूट डालने की कोशिशों को सरकार ने नाकाम किया है तथा युवाओं को मुख्यधारा में लाने, पुनर्वास, कट्टरता से दूर करने और रोजगार-व्यवसाय के अवसर देने पर काम किया गया है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में अभूतपूर्व प्रगति और युवाओं के लिए नए अवसर खुले हैं। सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर को आतंकियों तथा उनके आकाओं के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई बताते हुए उन्होंने कहा कि सिंधु जल संधि का निलंबन यह स्पष्ट संदेश था कि खून और पानी साथ नहीं बह सकते। उन्होंने कहा कि भारत युद्ध नहीं चाहता और किसी देश की जमीन पर कब्जा नहीं करना चाहता, लेकिन शांति और कमजोरी अलग हैं; भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश से बातचीत नहीं, बल्कि रक्षा बलों का माकूल जवाब होगा।
उन्होंने कहा कि युद्ध का स्वरूप बदल रहा है और जमीन, हवा तथा समुद्र के साथ अंतरिक्ष एवं साइबर क्षेत्र भी संघर्ष के नये क्षेत्र बन चुके हैं, जबकि एआई, ड्रोन, स्वायत्त प्रणाली और सटीक हथियार युद्धक्षेत्र बदल रहे हैं। सरकार रक्षा रणनीति को भविष्य के लिए तैयार कर रही है और स्वदेशी उन्नत तकनीक विकसित करने पर जोर है।श्री सिंह ने कहा कि रक्षा उत्पादन 2014 से पहले के करीब 40,000 करोड़ रुपए से बढ़कर लगभग 1.80 लाख करोड़ रुपए हो गया है, जबकि रक्षा निर्यात 56 गुना बढ़कर 38,000 करोड़ से अधिक हो गया है। सरकार का 2029 तक 50,000 करोड़ रुपए के रक्षा निर्यात का लक्ष्य है।
आकाशतीर, आकाश, पिनाका, अस्त्र, प्रचंड, ध्रुव, तेजस, अर्जुन, ड्रोन-काउंटर ड्रोन सिस्टम और स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत का उल्लेख करते हुए श्री सिंह ने कहा कि भारत छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान के विकास पर भी काम कर रहा है। रक्षा क्षेत्र के सभी 16 सार्वजनिक उपक्रम अब बिना घाटे के चल रहे हैं। रक्षा बजट पिछले 12 वर्षों में 2.5 लाख करोड़ से बढ़कर करीब 8 लाख करोड़ रुपए हो गया है। रक्षा क्षेत्र में 16,000 से अधिक एमएसएमई जुड़ चुके हैं और उत्तर प्रदेश एवं तमिलनाडु रक्षा औद्योगिक गलियारों के लिए करीब ₹70,000 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं, जिनमें लगभग 10,000 करोड़ रुपए का निवेश हो चुका है। रक्षा स्टार्टअप की संख्या 2018 के कुछ दर्जन से बढ़कर 2,000 से अधिक हो गयी है। मई में स्क्रैमजेट कंबस्टर का सफल परीक्षण हाइपरसोनिक मिसाइल विकास की दिशा में अहम कदम है।उन्होंने कहा कि सरकार ने डीआरडीओ की मिसाइल तकनीक भारतीय उद्योग को देने का फैसला किया है, ताकि निजी कंपनियां उनका उत्पादन कर सकें। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत 7.8% की वृद्धि दर के साथ आगे बढ़ रहा है और सेमीकंडक्टर, पीएलआई व स्वदेशी उत्पादन के जरिए आर्थिक सुरक्षा मजबूत की जा रही है। भारत रणनीतिक स्वायत्तता के साथ अपनी प्राथमिकताओं पर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि लक्ष्य रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के साथ ऐसा तंत्र बनाना है जो राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और वैश्विक सुरक्षा में भारत की भूमिका मजबूत करे तथा 2047 तक विकसित भारत के साथ तकनीक, अर्थव्यवस्था और रक्षा में दुनिया का नेतृत्व करने की क्षमता बनाए।