
नयी दिल्ली, 07 सितंबर। भारत में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून का चार महीने का सफ़र अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। हालांकि उत्तर-पश्चिम समेत कई इलाकों में मौसमी बारिश जारी है।भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी ) ने सोमवार को अनुमान लगाया कि 13 सितंबर तक कई राज्यों में भारी बारिश होगी और 10-13 सितंबर के आसपास हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में “काफ़ी ज़्यादा इलाकों में बारिश” होगी। मध्य भारत में भी, पश्चिमी और पूर्वी मध्य प्रदेश में “काफ़ी ज़्यादा से लेकर व्यापक बारिश” का अनुमान लगाया गया है।
हालाँकि, जैसा कि पिछले कई मौसम में देखा गया है, मॉनसून की वापसी भी उतनी ही अनियमित रही है जितना कि उसका आना और ठहरना। कई इलाकों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन के बावजूद, देश में अभी भी बारिश की 14 प्रतिशत कमी है; कुछ इलाकों में ज़रूरत से ज़्यादा बारिश हुई है तो कुछ इलाके सूखे हैं। अलग-अलग इलाकों के बीच का अंतर साफ़ दिखायी देता है —दक्षिण के बड़े हिस्से सूखे हैं, जबकि कई अन्य हिस्सों में ज़्यादा बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति बनी हुई है।मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि भारत की जीवन-रेखा (बारिश) पर अब असमान बारिश, लंबे समय तक सूखा और कम समय में बहुत तेज़ बारिश का असर साफ़ दिख रहा है। जलवायु परिवर्तन, समुद्र का बढ़ता तापमान, हवाओं के पैटर्न में बदलाव और अल-नीनो जैसी घटनाएं बारिश के तरीकों पर असर डाल रही हैं। इसी वजह से, कभी-कभी बहुत तेज़ बारिश के बावजूद, पूरे मौसम में बारिश की कमी हो सकती है।अभी तक, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में सामान्य से 27 प्रतशत और पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत में 24 प्रतिशत कम बारिश हुई है। उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में यह कमी क्रमशः 9 प्रतिशत और 5 प्रतिशत है। दक्षिणी भारत में, तटीय आंध्र प्रदेश और रायलसीमा जैसे इलाके सबसे ज़्यादा प्रभावित हैं; साथ ही पश्चिम में मराठवाड़ा, विदर्भ और सौराष्ट्र भी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं।हालांकि, पिछले कुछ दिनों में हुई भारी बारिश की वजह से दिल्ली-एनसीआर में सालाना सामान्य बारिश का आंकड़ा पार हो गया है, लेकिन कुल मिलाकर पंजाब, हरियाणा और दिल्ली इलाके में बारिश अभी भी सामान्य से 19 प्रतिशत कम है।कम बारिश वाले राज्यों में भी ज़िले-स्तर पर अंतर देखने को मिला है। मध्य भारत के कुछ हिस्सों में अलग-अलग तरह के हालात दिखे हैं, जहां सूखे जैसे हालात के बावजूद कहीं-कहीं हुई भारी बारिश से स्थानीय स्तर पर बाढ़ आ गई। उत्तर में, हिमाचल प्रदेश में सामान्य से लगभग 8 प्रतिशत कम बारिश हुई, लेकिन तेज़ बारिश के बाद भूस्खलन और सड़कें बंद होने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ा। ओडिशा में सामान्य से 20 प्रतिशत ज़्यादा बारिश हुई है।
मानसून की वापसी शुरू होने के साथ ही मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि वापसी का यह दौर अनियमित रहेगा।सक्रिय मौसम प्रणालियों के कारण कुछ इलाकों में बारिश जारी रह सकती है, जबकि प्रायद्वीपीय भारत में बारिश की गतिविधियां कम रहने की संभावना है। माना जा रहा है कि पूर्वोत्तर मानसून—जो अक्टूबर से दिसंबर के बीच तमिलनाडु, तटीय आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में मानसून के बाद की बारिश लाता है—उसमें देरी हो सकती है या बारिश असमान हो सकती है।