ईरान वार्ता में गतिरोध के बीच खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा, अमेरिका ने दो और ईरानी ड्रोन मार गिराये

ईरान वार्ता में गतिरोध के बीच खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ा, अमेरिका ने दो और ईरानी ड्रोन मार गिराये

तेहरान/वाशिंगटन, 07 जून । पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी की ईरान यात्रा और नये कूटनीतिक प्रयासों के बीच फारस की खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने शनिवार को दो और ईरानी ड्रोन मार गिराने का दावा किया, जिन्हें रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए खतरा बताया गया।

यह घटना एक दिन पहले अमेरिकी बलों द्वारा इसी क्षेत्र की ओर बढ़ रहे चार अन्य ईरानी हमलावर ड्रोन मार गिराने के बाद हुई है।

अमेरिकी केंद्रीय कमान (सेंटकॉम) ने कहा, “आज दिन में मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात के लिए खतरा बने ईरान के दो एकतरफा हमलावर ड्रोन मार गिराए। अमेरिकी बल ईरानी आक्रामकता के खिलाफ कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं।” इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच 24 अरब डॉलर की जब्ती की हुई ईरानी संपत्तियों को लेकर वार्ता में गतिरोध बना हुआ है। सीएनएन की एक रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट की सोच से परिचित एक सूत्र ने बताया कि अमेरिका उन ईरानी संपत्तियों का उपयोग खाड़ी देशों में ईरानी हमलों से क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए करने पर विचार कर रहा है।अप्रैल में युद्धविराम पर सहमति बनने के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव समाप्त नहीं हुआ है। दोनों देश कई महीनों से जारी युद्ध को समाप्त करने के लिए किसी अंतिम समझौते तक नहीं पहुंच सके हैं। इस संघर्ष में हजारों लोगों की मौत हो चुकी है और वैश्विक ऊर्जा संकट भी गहरा गया है।

युद्धविराम के बावजूद दोनों पक्षों के बीच कई बार सैन्य झड़पें हो चुकी हैं। अमेरिकी सेना ने शुक्रवार को गोरुक और क़ेश्म द्वीप स्थित रडार केंद्रों तथा ड्रोन कमान एवं नियंत्रण सुविधाओं पर हमला किया था। इसके जवाब में ईरान ने कुवैत और बहरीन की दिशा में मिसाइल एवं ड्रोन हमले किए। कुवैती और बहरीनी सुरक्षा बलों ने इन हमलों को विफल कर दिया।इससे पहले अमेरिकी सेना ने क्षेत्र में लगातार हो रहे हमलों के बाद ईरान के तटीय निगरानी रडार ठिकानों को भी निशाना बनाया था।

इसी सप्ताह ईरानी ड्रोन हमले में कुवैत के मुख्य हवाई अड्डे के यात्री टर्मिनल को भी नुकसान पहुंचा था। इस घटना में एक व्यक्ति की मौत हो गई थी, कई लोग घायल हुए थे और हवाई अड्डे का संचालन अस्थायी रूप से रोकना पड़ा था। हालांकि ईरान ने इस घटना में अपनी किसी भी भूमिका से इनकार किया है।संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए जारी वार्ताएं कई सप्ताह से चल रही हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया है। लेबनान में इजराइल और हिजबुल्ला के बीच बढ़ते टकराव ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

एक क्षेत्रीय अधिकारी के अनुसार ईरान चाहता है कि लेबनान में अलग से युद्धविराम सुनिश्चित किया जाए, तभी वह पूर्ण रूप से वार्ता प्रक्रिया में लौटेगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि युद्धविराम को आगे बढ़ाने के लिए बातचीत जारी है, हालांकि इसी दौरान अमेरिकी सेना ईरानी सैन्य ठिकानों पर हमले भी कर रही है।सेंटकॉम ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहे कई ड्रोन मार गिराने के बाद ईरानी तटीय रडार ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना ने यह भी दावा किया कि उसने रात भर कुवैत और बहरीन की ओर दागी गई अतिरिक्त ईरानी मिसाइलों और ड्रोन को भी रोक दिया। इन घटनाओं में किसी अमेरिकी सैनिक के हताहत होने की सूचना नहीं है।

ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी ने दावा किया कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने अमेरिकी हवाई अड्डे और अन्य अमेरिकी ठिकानों पर जवाबी हमले किये हैं। तेहरान ने अमेरिकी हमलों को युद्धविराम का “स्पष्ट उल्लंघन” बताया और कहा कि उसकी प्रतिक्रिया “सतर्क, निर्णायक और अनुपातिक” थी।कुवैत के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने उसके हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली सात बैलिस्टिक मिसाइलों को निष्क्रिय कर दिया। वहीं बहरीन ने तीन मिसाइलों और कई ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है। दोनों देशों ने किसी जनहानि की सूचना नहीं दी, लेकिन हमलों की कड़ी निंदा की।

संयुक्त अरब अमीरात, मिस्र और सऊदी अरब सहित कई क्षेत्रीय देशों ने भी ईरानी हमलों की आलोचना करते हुए कहा कि इससे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता को गंभीर खतरा पैदा हो गया है।वार्ता अभी भी कई प्रमुख मुद्दों पर अटकी हुई है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण है ईरान की जमी हुई संपत्तियों को मुक्त करना और प्रतिबंधों में राहत देने का समय तय करना। तेहरान चाहता है कि समझौते के पहले चरण के बाद उसे अरबों डॉलर की संपत्तियों तक तत्काल पहुंच मिले, जबकि वाशिंगटन का कहना है कि किसी भी वित्तीय राहत को ईरान द्वारा अपने दायित्वों, विशेष रूप से उच्च स्तर पर संवर्धित यूरेनियम के भंडार को छोड़ने, से जोड़ा जायेगा।

दोनों पक्ष इस बात पर भी सहमत नहीं हैं कि वित्तीय सहायता किस ढांचे के तहत दी जाए। प्रस्तावों में मानवीय उपयोग के लिए विशेष फंड, तीसरे पक्ष के माध्यम से संपत्तियों की रिहाई और खाड़ी देशों द्वारा समर्थित पुनर्निर्माण कोष जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।इसके अलावा ईरानी कच्चे तेल के निर्यात पर प्रतिबंधों में छूट, होर्मुज जलडमरूमध्य की समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दे भी अब तक अनसुलझे बने हुए हैं।

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