
लखनऊ, 7 जून। उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2030 तक राज्य में 2 गीगावाट से अधिक अतिरिक्त डेटा सेंटर क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि डेटा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल अवसंरचना भविष्य की अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार हैं और उत्तर प्रदेश को इस क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए व्यापक तैयारी की जा रही है।
रविवार को उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर नीति-2021 की समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निवेशकों की अपेक्षाओं के अनुरूप नई डेटा सेंटर नीति तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नई नीति पहले से अधिक आकर्षक, प्रतिस्पर्धी और निवेशक-अनुकूल होगी। इसमें एआई आधारित डेटा सेंटर, ग्रीन डेटा सेंटर, विश्वस्तरीय डिजिटल अवसंरचना, त्वरित अनुमोदन प्रणाली, निर्बाध विद्युत आपूर्ति और बेहतर कनेक्टिविटी पर विशेष जोर दिया जाएगा।
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि डेटा सेंटर नीति-2021 के तहत 900 मेगावाट क्षमता और 30 हजार करोड़ रुपये निवेश का लक्ष्य रखा गया था। इसके मुकाबले अब तक 21,342.90 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव स्वीकृत किए जा चुके हैं। वर्तमान में प्रदेश में छह डेटा सेंटर पार्क और दो डेटा सेंटर इकाइयां संचालित हैं, जबकि 644 मेगावाट क्षमता वाली परियोजनाओं पर कार्य प्रगति पर है।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि भूमि, पूंजी और ऋण संबंधी अनुदानों के साथ-साथ स्टाम्प शुल्क, विद्युत शुल्क तथा ट्रांसमिशन एवं व्हीलिंग शुल्क में दी जाने वाली रियायतों को और प्रभावी बनाया जाए। उन्होंने एआई आधारित उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग अवसंरचना और ऊर्जा दक्ष ग्रीन डेटा सेंटरों को विशेष प्रोत्साहन देने पर भी बल दिया।
अधिकारियों ने बताया कि हीरानंदानी समूह, एनटीटी ग्लोबल डेटा सेंटर्स, अडानी समूह, एसटी टेलीमीडिया, एसकेवीआर सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस, वेब वर्क्स और सिफी सहित कई प्रमुख कंपनियां प्रदेश में डेटा सेंटर परियोजनाओं पर कार्य कर रही हैं।
बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि विभिन्न राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने उत्तर प्रदेश में कुल 5,410 मेगावाट क्षमता के डेटा सेंटर विकसित करने में रुचि दिखाई है। इन प्रस्तावित परियोजनाओं में लगभग 4.90 लाख करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। संभावित निवेशकों में एएम ग्रीन, ट्राइफैक्टा कॉनेक्स, एस्सार, ग्रू एनर्जी, गोल्डन स्टेट कैपिटल, मैपलेट्री, सीटीआरएल-एस और एनएक्स्ट्रा जैसी कंपनियां शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि डेटा सेंटर विकास को केवल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) तक सीमित नहीं रखा जाएगा। नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र के अलावा लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ और सीतापुर समेत अन्य शहरों में भी डेटा सेंटर क्लस्टर विकसित किए जाएंगे, जिससे डिजिटल निवेश और रोजगार के अवसर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंच सकें