
लखनऊ, 7 जून। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जीव-जंतुओं और प्रकृति के पारस्परिक संबंधों पर आधारित अपनी विशेष पाती में पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के महत्व पर जोर देते हुए कहा है कि आधुनिकता आवश्यक है, लेकिन प्रकृति के संतुलन को बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों में कभी सहज रूप से दिखाई देने वाले जुगनू, गौरैया और मैना जैसे पक्षी अब लगभग गायब होते जा रहे हैं, जो चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक जीव-जंतु पर्यावरण और खाद्य श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा है तथा प्रकृति का संतुलन बनाए रखने में उनकी अहम भूमिका होती है।
उन्होंने सनातन परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रत्येक जीव को सृष्टि का अभिन्न अंग माना गया है। भगवान राम के जीवन प्रसंग का संदर्भ देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि रावण के संहार में राम की सेना में वानरों से लेकर छोटी गिलहरी तक ने योगदान दिया था। यह संदेश देता है कि सृष्टि का कोई भी जीव महत्वहीन नहीं है।
मुख्यमंत्री ने अपनी पाती में लिखा कि “हर जीव है बहुत जरूरी, प्रकृति से ही जीवन चलता”। उन्होंने कहा कि मानव और प्रकृति का संबंध परस्पर निर्भरता का है और यदि जैव विविधता को नुकसान पहुंचता है तो उसका सीधा प्रभाव मानव जीवन पर भी पड़ता है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश सरकार के संरक्षण प्रयासों से उत्तर प्रदेश में बाघ, तेंदुए और सारस जैसे वन्य जीवों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही राज्य के 13 आर्द्रभूमि स्थलों (वेटलैंड्स) को रामसर सूची में शामिल किया जाना पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में कई दुर्लभ जीव-जंतु अब पुनः दिखाई देने लगे हैं, जो सकारात्मक संकेत हैं। उन्होंने इसे सरकार, वन विभाग और आम जनता के संयुक्त प्रयासों का परिणाम बताया।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जैव विविधता संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसमें जनभागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं से अपील की कि वे प्रकृति को समझें, उसके बारे में सीखें और अपने अनुभव समाज के साथ साझा करें।
उन्होंने कहा कि प्रकृति के प्रति जागरूकता ही भविष्य की सबसे बड़ी सुरक्षा है और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित एवं संतुलित पर्यावरण देने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।