काशी की गलियों में रास्ता दिखाएगा एआई आधारित ‘बेहतर वे’ ऐप

काशी की गलियों में रास्ता दिखाएगा एआई आधारित ‘बेहतर वे’ ऐप

वाराणसी, 8 जून। धार्मिक और सांस्कृतिक नगरी काशी में आने वाले श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को अब संकरी और जटिल गलियों में रास्ता खोजने में कठिनाई नहीं होगी। स्मार्ट सिटी परियोजना के अंतर्गत विकसित ‘बेहतर वे’ (बेटर वे) नामक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित पैदल यात्री नेविगेशन ऐप यात्रियों को काशी की गलियों में आसानी से मार्गदर्शन प्रदान करेगा।वोजिक एआई के उत्तर प्रदेश ऑपरेशन हेड कुशाग्र राव ने बताया कि यह प्लेटफॉर्म विशेष रूप से पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। ऐप हिंदी, तमिल, उड़िया, मराठी, गुजराती, बांग्ला सहित कई भारतीय भाषाओं के साथ-साथ अंग्रेजी, फ्रेंच और स्पेनिश भाषाओं में भी उपलब्ध है।

उन्होंने बताया कि ऐप में काशी की गलियों में स्थित प्रमुख मंदिरों, गंगा घाटों, प्रसिद्ध बनारसी व्यंजनों की दुकानों, बनारसी साड़ी प्रतिष्ठानों, जीआई टैग उत्पादों की दुकानों तथा अन्य महत्वपूर्ण स्थलों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई है। वाराणसी शहर के लगभग 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को इस डिजिटल मैपिंग परियोजना में शामिल किया गया है।कुशाग्र राव के अनुसार, सामान्य नेविगेशन प्लेटफॉर्म जहां मुख्य रूप से सड़कों और वाहनों के लिए उपयोगी होते हैं, वहीं काशी जैसे शहर में पैदल यात्रियों को गलियों के जाल में अक्सर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के समाधान के लिए यह ऐप विकसित किया गया है।

इस परियोजना को तैयार करने में आठ महीने से अधिक समय लगा। विशेष बात यह रही कि मैपिंग का कार्य किसी वाहन के माध्यम से नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों द्वारा पैदल चलकर किया गया, जो काशी की गलियों, मंदिरों, बाजारों और घाटों की गहरी जानकारी रखते हैं। इसके साथ ही क्राउड-सोर्सिंग तकनीक का भी उपयोग किया गया।ऐप में उपयोगकर्ता अपनी वर्तमान लोकेशन और गंतव्य दर्ज करते ही कई वैकल्पिक पैदल मार्ग प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, विभिन्न गलियों और स्थलों से जुड़ी ऑडियो स्टोरी भी उपलब्ध कराई गई है, जिसे सुनते हुए पर्यटक काशी के इतिहास और संस्कृति को जान सकते हैं। थ्री-डी वीडियो आधारित मार्गदर्शन भी ऐप की विशेषताओं में शामिल है।

धार्मिक आयोजनों और भीड़भाड़ के समय यह ऐप और अधिक उपयोगी साबित हो सकता है। सावन, महाशिवरात्रि या अन्य प्रमुख पर्वों के दौरान जिन मार्गों पर बैरिकेडिंग या प्रतिबंध लागू होते हैं, ऐप उन रास्तों को नेविगेशन में शामिल नहीं करेगा और वैकल्पिक मार्ग सुझाएगा।इस पहल का उद्देश्य केवल धार्मिक पर्यटन को सुविधाजनक बनाना ही नहीं, बल्कि स्थानीय बाजारों, हस्तशिल्प और व्यापार को भी बढ़ावा देना है। ऐप के माध्यम से पर्यटक विश्वनाथ धाम, काल भैरव मंदिर, संकट मोचन मंदिर और गंगा घाटों के अलावा काशी की ऐतिहासिक गलियों और स्थानीय संस्कृति को भी करीब से जान सकेंगे।

मैपिंग और डेटा संग्रहण की विस्तृत प्रक्रिया के बाद तैयार किए गए इस ऐप को अब तक 20 हजार से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है। इसे मोबाइल के प्ले स्टोर से डाउनलोड किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में इस मॉडल को देश के अन्य प्रमुख धार्मिक और पर्यटन शहरों में भी लागू किया जा सकता है।

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