2024 का जनादेश मोदी के लिए नहीं था: कांग्रेस

2024 का जनादेश मोदी के लिए नहीं था: कांग्रेस

नयी दिल्ली, 10 जून। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लगातार सबसे लंबे समय तक प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड बनाने के बीच बुधवार को कहा कि सच यही है कि 2024 का जनादेश उनके (श्री मोदी) लिए नहीं था।कांग्रेस ने इस मौके पर पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू को याद करते हुए उन्हें आधुनिक भारत का निर्माता बताया और कहा कि 17 करोड़ मतदाताओं वाली मतदाता सूची उन्होंने ही तैयार करवाई थी।

कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “ जहां नेहरू 1952, 1957 और 1962 में विशाल बहुमत से जीते थे, वहीं श्री मोदी 2024 में साधारण बहुमत भी हासिल नहीं कर पाये और उन्हें खुद को प्रधानमंत्री बनाने के लिए भाजपा संसदीय दल को दरकिनार करके जल्दबाजी में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की बैठक बुलानी पड़ी। सच यही है कि 2024 का जनादेश निश्चित रूप से उनके लिए नहीं था।”श्री रमेश ने लिखा कि 15 अगस्त 1947 को पंडित जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रधानमंत्री बने और उन्होंने एक ऐसी शानदार कैबिनेट की अगुवाई की, जैसी दुनिया में शायद ही कभी देखी गयी हो। उसके बाद अगले पांच साल में आधुनिक भारत का निर्माण हुआ।

कांग्रेस नेता ने कहा कि इसी दौरान 560 से ज़्यादा देशी रियासतों को शांतिपूर्ण ढंग से भारतीय संघ में विलय कराया गया, भारत के संविधान पर चर्चा हुई और उसे अपनाया गया, ज़मींदारी प्रथा खत्म की गयी, अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षण लागू किया गया, कई बहुउद्देशीय सिंचाई और बिजली परियोजनाएं शुरू की गयीं, विज्ञान और तकनीक (जिसमें परमाणु ऊर्जा भी शामिल है) के लिए अवसंरचना तैयार की गयी और भारत वैश्विक मामलों में एक ताकत के रूप में उभरा।उन्होंने कहा कि इसी बीच सभी वयस्कों को वोट देने का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए 17 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं वाली मतदाता सूची तैयार की गयी और आज़ाद भारत के पहले आम चुनाव अक्टूबर 1951 से फरवरी 1952 के बीच कराये गये।

कांग्रेस नेता ने कहा, “ पंडित नेहरू के प्रधानमंत्री काल 1947-52 के दौरान भारत की उपलब्धियों के उस रिकॉर्ड में सरदार वल्लभ भाई पटेल, बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सी. राजगोपालाचारी, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद जैसे दिग्गजों ने अहम भूमिका निभाई थी। श्री मोदी अब उसे ही मिटाना चाहते हैं। हो सकता है कि उन्होंने आज खुद से तय किया हुआ और संदिग्ध तरीके से गढ़ा हुआ कोई माइलस्टोन (उपलब्धि) हासिल कर ली हो, लेकिन वह भारत के गले में एक बोझ की तरह हैं, क्योंकि वह भारत में लोकतंत्र की हत्या के लिए ज़िम्मेदार हैं। लोकतंत्र के वही संस्थान – एक स्वतंत्र चुनाव आयोग और एक पवित्र मतदाता सूची – अब खतरे में हैं। हमारे शिक्षण संस्थानों को बर्बाद करके वैज्ञानिक सोच को खत्म कर दिया गया है, जैसा कि हाल ही में नीट, सीबीएसई घोटालों से पता चला है। -निजीकरण और ‘उपयुक्त नहीं पाया गया- जैसे गलत तरीकों से अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ा वर्गों के आरक्षण को कमज़ोर किया गया है।”

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