
नयी दिल्ली, 25 जुलाई। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शनिवार शाम श्री धर्मेंद्र प्रधान का मंत्रिमंडल से इस्तीफा स्वीकार कर लिया। उनकी जगह उपभोक्ता एवं खाद्य मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।श्री प्रधान ने आज अपराह्न शिक्षा मंत्री के पद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा भेजा था। राष्ट्रपति भवन के अनुसार, श्रीमती मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर तत्काल प्रभाव से श्री प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री की सलाह पर श्री जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।
श्री प्रधान 07 जुलाई 2021 से शिक्षा मंत्री के पद पर थे। नीट पेपर लीक को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के बैनर तले विद्यार्थियों के धरना-प्रदर्शन और विपक्षी दलों के दबाव के बीच श्री प्रधान ने अपने पद से त्यागपत्र दिया था।सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर आज दोपहर युवाओं के नाम पोस्ट किये गये एक पत्र में उन्होंने लिखा कि बच्चों के भविष्य और देश विरोधी ताकतों को मौजूदा परिस्थितियों का लाभ उठाने से रोकने के लिए उन्होंने त्यागपत्र दिया है।उन्होंने पत्र में लिखा, “जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ न उठाएं, देश की एकता बनी रहे, देश के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में न उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर फोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है।”
उन्होंने कहा कि यह उनके लिए यह व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। पिछले 10 दिन का घटनाक्रम देखकर उनका मन दुःखी है। युवाशक्ति को “देश की असली ताकत” बताते हुए उन्होंने कहा कि वह युवाओं को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं देंगे। उन्होंने मंत्रिमंडल में मार्गदर्शन, विश्वास और निरंतर सहयोग के लिए श्री मोदी के प्रति हार्दिक कृतज्ञता व्यक्त की और कहा कि वह राष्ट्रसेवा के लिए सदैव समर्पित रहेंगे।नीट पेपर लीक मुद्दे पर श्री प्रधान ने कहा कि उन्होंने पहले दिन से ही जिम्मेदारी ली है और कभी परिस्थिति से मुंह नहीं मोड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि नीट पेपर लीक के बाद कई छात्रों को गुमराह करने के लिए “जिम्मेदार पदों पर बैठे व्यक्तियों” ने बाधा डालने की कोशिश की। उन्होंने लिखा, “मेरा यह संकल्प था कि हम किसी भी मेधावी छात्र की संभावना परीक्षा माफिया के कारण खराब नहीं होने देंगे, किसी भी छात्र के साथ अन्याय नहीं होने देंगे।”शिक्षा मंत्री ने कहा कि गत 03 मई को नीट परीक्षा में अनियमितता की बात सामने आने के बाद सरकार ने तुरंत संज्ञान लेते हुए जांच सीबीआई को सौंपी और परीक्षा को रद्द किया तथा पुनः परीक्षा की तिथि घोषित की गयी। इसके साथ ही अगले वर्ष से इस परीक्षा को कंप्यूटर आधारित मोड में करने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने कहा कि नीट की पुनर्परीक्षा के लिए पूरी सरकार ने मिलकर काम किया और राज्य सरकारों, विशेषकर जिला प्रशासन, छात्रों तथा अभिभावकों के सहयोग से 21 जून 2026 को यह परीक्षा पूर्ण हुई और 16 जुलाई को घोषित नीट-यूजी के परिणाम संतोषजनक रहे जिसमें गरीब पृष्ठभूमि से आए कई मेधावी छात्रों को भी सफलता मिली। उन्होंने पत्र में लिखा कि वह पिछले चार दशक से अधिक समय से छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं।उन्होंने लिखा, “मैं सदैव हमारे प्रजातंत्र की शक्ति में अटूट विश्वास रखने वाला रहा हूं तथा युवाओं की आकांक्षाओं, सपनों और अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता आया हूँ। वे केवल भारत का भविष्य ही नहीं हैं, बल्कि एक नए और विकसित भारत के वाहक, निर्माता और भविष्य के शिल्पकार भी हैं। मैं देश के युवाओं की आकांक्षाओं, भावनाओं और उनकी न्यायोचित अपेक्षाओं का गहरा सम्मान करता हूँ। भारत की युवा पीढ़ी के सपनों को साकार करना हम सभी के राजनीतिक एवं सामाजिक जीवन का नैतिक संकल्प रहा है। आदरणीय प्रधानमंत्री जी के दूरदर्शी नेतृत्व में राष्ट्र की सेवा करने का जो अवसर मुझे प्राप्त हुआ उसके लिए मैं प्रधानमंत्री जी का आभार प्रकट करता हूं।”
नीट पेपर लीक मामले पर सीजेपी गत 20 जून से दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना और प्रदर्शन कर रही है। उनके समर्थन में सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने गत 28 जून से 26 दिन का अनशन किया था। आंदोलनकारी श्री प्रधान का इस्तीफा मांग रहे थे। साथ ही वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार की भी मांग कर रहे हैं।मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में 27 मई 2014 से 03 सितंबर 2017 तक श्री प्रधान पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) रहे। इसके बाद उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया और 03 सितंबर 2017 से 30 मई 2019 तक उनके पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के साथ कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय का भी कार्यभार था।
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में उन्हें 30 मई 2019 से 07 जुलाई 2021 तक पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और इस्पात मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गयी। मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद 07 जुलाई 2021 से 09 जून 2024 तक वह शिक्षा मंत्री और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री रहे। उन्हें मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में 09 जून 2024 से शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गयी थी।उनका लोकसभा सांसद के रूप में यह दूसरा कार्यकाल है। पहली बार वह जून 2004 से जून 2009 तक लोकसभा के लिए चुने गये थे। वह अप्रैल 2012 से अप्रैल 2024 तक दो बार राज्यसभा से सदस्य भी रहे हैं।
श्री प्रधान बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। कॉलेज के समय में वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) में सक्रिय रहे। ओडिशा के तालचर कॉलेज में उच्चतर माध्यमिक छात्र के रूप में वर्ष 1983 में वह एबीवीपी के कार्यकर्ता बने और 1985 में तालचर कॉलेज स्टूडेंट्स यूनियन के अध्यक्ष चुने गये।वर्ष 1993 में वह एबीवीपी के राज्य सचिव और 1995 में राष्ट्रीय सचिव नियुक्त हुए। वह 1998 में भारतीय जनता पार्टी के सदस्य बने।
ओडिशा की राजनीति में भी श्री प्रधान काफी सक्रिय रहे। लोकसभा के लिए चुने जाने से पहले वह जून 2000 से जून 2004 तक विधानसभा के सदस्य रहे।इस दौरान वह साल 2001 में भाजपा युवा प्रकोष्ठ, ओडिशा के अध्यक्ष चुने गये। वह साल 2002 में भाजपा युवा प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय सचिव और 2004 में राष्ट्रीय अध्यक्ष बने।