अमेरिका के हमलों ने पश्चिम एशिया में जारी युद्धविराम को ‘बेमतलब’ बना दियाः ईरान

अमेरिका के हमलों ने पश्चिम एशिया में जारी युद्धविराम को ‘बेमतलब’ बना दियाः ईरान

तेहरान, 11 जून। ईरान ने गुरुवार को अमेरिका की ओर से किए गये हमलों की कड़ी निंदा की और इन्हें गैर-कानूनी और आपराधिक बताया।ईरान ने अमेरिका पर अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करने तथा आठ अप्रैल से लागू संघर्ष-विराम को असल में बेमतलब बनाने का आरोप लगाया।

ईरान के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “हाल के कुछ घंटों में अमेरिका द्वारा किए गय गैर-कानूनी और आपराधिक हमले न केवल संयुक्त राष्ट्र चार्टर और देशों की राष्ट्रीय संप्रभुता तथा क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान से जुड़े अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी सिद्धांतों का खुला उल्लंघन हैं, बल्कि इन्होंने आठ अप्रैल के संघर्ष-विराम को भी बेमतलब बना दिया है।”मंत्रालय ने कहा कि ईरान”अपने खिलाफ आक्रामक हमलों के मूल और स्रोत को बेअसर करने के लिए काम करेगा और संयुक्त राष्ट्र के सभी सदस्य देशों से आह्वान किया कि वे इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का घोर उल्लंघन मानते हुए इसका विरोध करें। ईरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिका और इजरायली शासन की मनमानी और दादागिरी के सामने चुप्पी और निष्क्रियता दुनिया को और अधिक अराजकता और असुरक्षा की ओर धकेल देगी।

इस बीच, खाड़ी इलाके में बढ़ते तनाव के बीच मीडिया रिपोर्ट में एशिया जाने वाले तीन लिक्विफाइड नेचुरल गैस (एलएनजी) टैंकरों के परिवहन ट्रांसपोंडर बंद करके होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकलने की खबर है। कतर एनर्जी के कंट्रोल वाले टैंकर ‘लेब्रेथा’ और ‘रशीदा’ (जिनमें रास लाफ़ान में माला लादा गया गया था।) आखिरी बार क्रमशः एक जून और 30 अप्रैल को जलडमरूमध्य के पश्चिम में देखे गये थे और फिर 10 जून को निगरानी प्रणाली पर दोबारा दिखाई दिए।’लेब्रेथा’, जिसमें 22 मई को कार्गो लोड किया गया था, पाकिस्तान जा रहा है, जबकि ‘रशीदा’, जिसमें 27 फरवरी से एलएनजी लदा है, दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर बढ़ रहा है।

तीसरा एलएनजी टैंकर ‘मैरीगोल्ड’ भी 10 जून को शिप-ट्रैकिंग डेटा पर दोबारा दिखाई दिया और खबर है कि यह भारत की ओर बढ़ रहा है। मैरीगोल्ड का प्रबंधन अबू धाबी राष्ट्रीय तेल कंपनी (एडीएनओसी) करती है। इस तरह से फरवरी के आखिर में संघर्ष शुरू होने के बाद से ‘लेब्रेथा’, ‘रशीदा’ और ‘मैरीगोल्ड’ समेत कुल 12 एलएनजी कार्गो होर्मुज जलडमरूमध्य से बाहर निकल चुके हैं।इसके अलावा, ईरान की मीडिया ने कुछ तस्वीरें जारी की हैं जिनमें दक्षिणी ईरान में पीने के पानी के एक नष्ट हुए रिज़र्वॉयर (पानी जमा करने की जगह) पर अमेरिका में बने प्रिसिजन-गाइडेड बम के अवशेष (बचे हुए टुकड़े) दिखाई दे रहे हैं।

ईरान की अर्ध-सरकारी मेहर समाचार एजेंसी ने बुरी तरह क्षतिग्रस्त पानी जमा करने की केंद्र और हथियारों के टुकड़ों की तस्वीरें प्रकाशित की है। ये हथियार अमेरिका में बने जीबीयू -39 सीरीज़ के प्रिसिजन-गाइडेड बम के हैं। अमेरिका ने मंगलवार को ईरान के खिलाफ हमले किए थे, क्योंकि ईरान पर अमेरिका के अपाचे हेलीकॉप्टर को मार गिराने का आरोप था।हालांकि, अमेरिका ने इस बात की पुष्टि नहीं की है कि उन अभियानों के दौरान पानी के केंद्र पर हमला हुआ था या नहीं। अमेरिकी सेंट्रल कमान के प्रवक्ता कैप्टन टिमोथी हॉकिन्स ने कहा कि सेंटकॉम को इस घटना से जुड़ी खबरों की जानकारी है और वे मामले की जांच कर रहे हैं, लेकिन उन्होंने पानी केंद्र के बारे में आगे के सवालों का जवाब देने से इनकार कर दिया।

इससे पहले, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर कहा था कि अमेरिका ईरान के पानी को खारेपन से मुक्त करने वाले प्लांट (डीसेलिनेशन प्लांट) को निशाना बना सकता है। इस प्रस्ताव से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के कई सहयोगी देश चिंतित हो गये थे। मेहर की रिपोर्ट के अनुसार होर्मोज़गन वॉटर एंड वेस्टवॉटर कंपनी के मुख्य कार्यकारी अब्दुल हामिद हमज़ेहपोर ने कहा, “बमानी जिले में कुल 2,500 क्यूबिक मीटर क्षमता वाले कंक्रीट के दो पानी जमा करने वाले रिज़र्वॉयर पर मिसाइलों से हमला किया गया और वे पूरी तरह से बेकार हो गए।”ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी ने बताया कि इन रिज़र्वॉयर से कम से कम 20,000 लोगों को पानी मिलता था। मेहर द्वारा प्रकाशित तस्वीरों में एक रिज़र्वॉयर की छत गिरी हुई और घटनास्थल के आसपास मलबा बिखरा हुआ दिखाई दे रहा है। संरचना से जुड़ी बड़ी पाइपलाइनें बताती हैं कि इसमें लगभग पांच लाख लीटर पानी जमा किया जा सकता था।

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