
नीस (फ्रांस), 14 जून। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने भारत को वैश्विक नवाचार और बेहतर तकनीकों का अग्रणी देश करार देते हुए कहा है कि उसे अब केवल प्रतिभाओं के स्रोत या आउटसोर्सिंग सेवाओं के प्रदाता के रूप में नहीं देखा जाता, बल्कि वह तकनीकी नवाचार के भविष्य को आकार देने वाला देश बन चुका है।
नीस में ‘भारत इनोवेट्स 2026’ कार्यक्रम के उद्घाटन के अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रपति मैक्रॉन ने रविवार को भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश , इंजीनियरिंग प्रतिभा और तकनीकी उपलब्धियों की चर्चा की । उन्होंने फ्रांस को यूरोप के अग्रणी नवाचार केंद्र और भारत की विकास महत्वाकांक्षाओं के लिए एक स्वाभाविक भागीदार के रूप में पेश किया।
श्री मैक्रॉन ने भारत की 1.4 अरब की आबादी और कुशल पेशेवरों के विशाल पूल का जिक्र करते हुए कहा, “आपके पास जनसांख्यिकीय लाभांश है। एक देश जो पूरे यूरोप और अमेरिका को मिलाकर जितने इंजीनियर तैयार करता है यानी हर साल 10 लाख से अधिक वह वैश्विक नवाचार का नेतृत्व कर रहा है।” उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए ‘चंद्रयान-3’ मिशन की सफलता को देश की तकनीकी और औद्योगिक क्षमताओं का एक बड़ा प्रमाण बताया।
श्री मैक्रॉन ने भारत के प्रति बदलते वैश्विक नजरिए पर कहा, “भारत केवल प्रतिभा का वादा करने और उसे देने वाला देश नहीं है। यह केवल ठेकेदारों से भरा देश नहीं है। बिल्कुल नहीं। यह नवाचार और प्रौद्योगिकियों का देश है।” राष्ट्रपति मैक्रॉन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संयुक्त रूप से इस कार्यक्रम का उद्घाटन किया। दोनों देशों के बीच सहयोग को गहरा करने पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “हम ‘मेक इन इंडिया’ पहल का सम्मान करते हैं और फ्रांस विभिन्न क्षेत्रों में इसका हिस्सा रहा है। भारत और फ्रांस के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सच्ची साझेदारी है।”
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने नागरिक परमाणु ऊर्जा को भविष्य के सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया। उन्होंने कहा, “सिविल न्यूक्लियर एनर्जी क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग का विस्तार करने की काफी गुंजाइश है, जिसमें ‘स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स’ का क्षेत्र भी शामिल है।”
इस अवसर पर श्री मैक्रॉन ने फ्रांस को निवेश के लिए लगातार सात वर्षों से यूरोप का सबसे आकर्षक गंतव्य बताया और हाल ही में ‘चूज़ फ्रांस’ के माध्यम से 93 बिलियन यूरो के निवेश की पुष्टि होने का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि एआई की वैश्विक रेस कंप्यूटिंग क्षमता, प्रतिभा और स्वच्छ ऊर्जा की उपलब्धता से तय होगी, जहां फ्रांस का डीकार्बोनाइज्ड एनर्जी मिक्स डेटा सेंटरों के लिए बेहद फायदेमंद है। उन्होंने गर्व से कहा, “फ्रांस यूरोप का एकमात्र ऐसा देश है जिसके पास ‘मिस्ट्रल एआई’ के माध्यम से एक बड़ा भाषा मॉडल इकोसिस्टम है, जो चीन और अमेरिका से मुकाबला करने में सक्षम है।”
श्री मैक्रॉन ने घोषणा की कि वे आने वाले दिनों में प्रौद्योगिकी सम्मेलन ‘विवाटेक’ में भी प्रधानमंत्री मोदी के साथ शामिल होंगे। यह पहल दोनों देशों के बीच तकनीकी संप्रभुता को मजबूत करने और सतत आर्थिक विकास को गति देने की दिशा में एक और बड़ा कदम होगी।