अमेरिका-ईरान वार्ता में अहम फ़ैसले ले रहे थे आईआरजीसी कमांडर वाहिदी : रिपोर्ट

अमेरिका-ईरान वार्ता में अहम फ़ैसले ले रहे थे आईआरजीसी कमांडर वाहिदी : रिपोर्ट

तेहरान, 14 जून । ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) के प्रमुख अहमद वाहिदी अमेरिका-ईरान वार्ता में एक अहम शक्ति केंद्र बनकर उभरे हैं और तेहरान की रणनीति तय करने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

अमेरिकी अखबार वॉल स्ट्रीट जर्नल (डब्ल्यूएसजे) की शनिवार की एक रिपोर्ट में ईरानी और अरब अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि श्री वाहिदी ने वार्ता के दौरान लगातार अमेरिका को रियायतें देने का विरोध किया और सख्त रुख अपनाने की वकालत की। रिपोर्ट के अनुसार दक्षिणी बेरूत में हिजबुल्ला के ठिकानों पर इजरायली हमलों के बाद इजरायल पर पिछले सप्ताह किये गये ईरानी मिसाइल हमलों के प्रमुख समर्थकों में भी श्री वाहिदी शामिल थे।

बताया गया है कि ईरान के कुछ अपेक्षाकृत नरम रुख वाले नेताओं ने घरेलू आर्थिक चुनौतियों और अमेरिका के साथ वार्ता पर पड़ने वाले असर को देखते हुए प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई का विरोध किया था, लेकिन श्री वाहिदी ने प्रतिरोधक क्षमता बहाल करने के लिए जवाबी हमलों का समर्थन किया। इसके बाद ईरान ने रविवार रात से सोमवार सुबह के बीच इजरायल पर कई चरणों में बैलिस्टिक मिसाइल हमले किये और 24 मिसाइलें दागीं। इन हमलों के बाद वार्ता टूटने की आशंका जतायी जा रही थी, लेकिन ईरान और अमेरिका ने बातचीत फिर शुरू कर दी और संभावित समझौता ज्ञापन (एमओयू) की दिशा में आगे बढ़े। रिपोर्ट में कहा गया है कि श्री वाहिदी और आईआरजीसी किसी त्वरित समझौते के रास्ते में प्रमुख आंतरिक बाधाओं में रहे हैं। उनका मानना था कि ईरान अपनी शर्तें मनवाने की बेहतर स्थिति में है और उसे अपनी मांगों से पीछे नहीं हटना चाहिए।

डब्ल्यूएसजे के अनुसार श्री वाहिदी ने अमेरिका और इजरायल की कार्रवाइयों के खिलाफ अधिक कड़ा जवाब देने और खाड़ी क्षेत्र में अधिक सक्रिय भूमिका अपनाने की भी पैरवी की। उनका रुख राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और विदेश मंत्री अब्बास अराघची से अलग बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार दोनों नेता आर्थिक दबाव कम करने और क्षेत्रीय व्यापार मार्गों को फिर खोलने के लिए शीघ्र समझौते के पक्ष में थे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन मतभेदों में अक्सर वाहिदी की राय हावी रही और समय के साथ रणनीतिक फैसलों पर उनका प्रभाव बढ़ता गया।डब्ल्यूएसजे के हवाले से कहा गया है कि श्री वाहिदी ने लेबनान में हिजबुल्ला के खिलाफ इजरायली अभियान को अमेरिका-ईरान वार्ता से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। उनका कहना था कि किसी व्यापक समझौते में हिजबुल्ला के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई का अंत भी शामिल होना चाहिए। वर्ष 1979 में आईआरजीसी की स्थापना करने वालों में शामिल श्री वाहिदी ने बाद में कुद्स फोर्स के गठन में भी भूमिका निभायी और उसके कमांडर रहे। इसके अलावा वह ईरान के रक्षा मंत्री और गृह मंत्री जैसे अहम पदों पर भी रह चुके हैं। रिपोर्ट के अनुसार उनकी पृष्ठभूमि मुख्य रूप से खुफिया तंत्र से जुड़ी रही है, इसलिए आईआरजीसी के शीर्ष पद तक उनका पहुंचना असामान्य माना जाता है।

श्री वाहिदी 1994 में अर्जेंटीना में यहूदी सामुदायिक केंद्र पर हुए बम विस्फोट के मामले में इंटरपोल को वांछित हैं। उस हमले में 85 लोग मारे गये थे। वर्ष 2022 में ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दमन से जुड़े आरोपों के कारण उन पर अमेरिकी प्रतिबंध भी लगे हुए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि आईआरजीसी का नेतृत्व संभालने के बाद वाहिदी ईरान की सुरक्षा व्यवस्था के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में शामिल हो गये हैं और सैन्य रणनीति से लेकर विदेशी शक्तियों के साथ वार्ता तक कई अहम मामलों में उनकी भूमिका निर्णायक मानी जा रही है।

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