मोदी और मैक्रों ने द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा सहयोग को अधिक सशक्त बनाने पर सहमति व्यक्त की

मोदी और मैक्रों ने द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा सहयोग को अधिक सशक्त बनाने पर सहमति व्यक्त की

नयी दिल्ली 14 जून । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को फ्रांस के शहर नीस स्थित विला केरीलोस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की और रक्षा प्लेटफार्म तथा उन्नत प्रौद्योगिकियों के सह सह-डिज़ाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन पर पर जोर देते हुए रक्षा सहयोग को अधिक सशक्त बनाने पर सहमति व्यक्त की ।दोनों देश अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने के लिए एक उच्च स्तरीय तंत्र स्थापित करने पर भी राजी हुए। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों में नवाचार और प्रौद्योगिकी साझेदारी को दीर्घकालिक दिशा प्रदान करने के लिए “नवाचार रोड़मैप 2030” को अपनाया।

फ्रांस की यात्रा पर गये श्री मोदी ने श्री मैक्राें के साथ ‘ भारत इनोवेट’ प्रदर्शनी के उद्घाटन के बाद फ्रांसीसी राष्ट्रपति के साथ द्विपक्षीय बैठक में संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर व्यापक चर्चा की। इस वर्ष के शुरू में भारत-फ्रांस संबंधों को ‘विशेष वैश्विक सामरिक साझेदारी’ के स्तर तक उन्नत किए जाने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली बैठक थी।दोनों नेताओं ने सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की उत्कृष्ट प्रगति और गहराई पर संतोष व्यक्त किया तथा रक्षा मंचों और उन्नत प्रौद्योगिकियों के सह-डिज़ाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन पर विशेष ध्यान देते हुए इसे और अधिक सशक्त बनाने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग की समृद्ध विरासत का उल्लेख किया और मानव अंतरिक्ष उड़ान तथा अंतरिक्ष जागरूकता के क्षेत्र में सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा की। उन्होंने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी क्षेत्र के सहयोग का विस्तार करने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया। असैन्य परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र का जिक्र करते हुए इस बात पर जोर दिया गया कि भारत का शांति अधिनियम सहयोग के नए अवसर प्रदान करता है, जिनमें छोटे और उन्नत मॉड्यूलर रिएक्टरों पर सहयोग भी शामिल है।

दोनों पक्षों ने ‘होराइजन 2047 रोडमैप’ के अंतर्गत हुई प्रगति की समीक्षा करते हुए आर्थिक विकास, प्रौद्योगिकी और नवाचार, प्रतिभा गतिशीलता तथा लोगों के बीच और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ और विविधतापूर्ण बनाने के लिए ठोस विचार साझा किए। इस संदर्भ में उन्होंने द्विपक्षीय व्यापार में निरंतर वृद्धि का उल्लेख किया और अगले पाँच वर्षों में इसे दोगुना करने के लिए एक उच्च-स्तरीय तंत्र स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते के शीघ्र क्रियान्वयन का आह्वान किया, जो द्विपक्षीय व्यापार और निवेश के विस्तार का एक विशिष्ट अवसर प्रदान करता है। नेताओं ने लघु एवं मध्यम उद्यम, विमानन और रेलवे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के उपायों पर भी चर्चा की। उन्होंने कानपुर में वैमानिकी कौशल विकास हेतु उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के समझौते का स्वागत किया। आर्थिक सुरक्षा पर संवाद की स्थापना का स्वागत करते हुए दोनों नेताओं ने विशेष रूप से महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में आपूर्ति श्रृंखला की सुदृढ़ता को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।द्विपक्षीय संबंधों में नवाचार और प्रौद्योगिकी की महत्वपूर्ण भूमिका को स्वीकार करते हुए उन्होंने साझेदारी को दीर्घकालिक दिशा प्रदान करने के लिए “नवाचार रोडमैप 2030” को अपनाया। दोनों नेताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर सहयोग का विस्तार करने पर चर्चा की और इस उद्देश्य के लिए भारत-फ्रांस संयुक्त कृत्रिम बुद्धिमत्ता कार्य समूह स्थापित करने पर सहमति व्यक्त की। दोनों देशों के नेताओं द्वारा नीस में संयुक्त रूप से “भारत इनोवेट ‘ कार्यक्रम का उद्घाटन तथा प्रधानमंत्री की पेरिस में विवाटेक में आगामी भागीदारी ने गहन प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, कृषि-प्रौद्योगिकी, चिकित्सा-प्रौद्योगिकी, नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच साझेदारी को और सुदृढ़ किया है। दोनों नेताओं ने फ्रांस में यूपीआई के निरंतर विस्तार तथा दोनों देशों के नवाचार संस्थानों के बीच 19 समझौतों पर हस्ताक्षर का स्वागत किया।

दोनों नेताओं ने लोगों के बीच संबंधों को और मजबूत करने के महत्व पर बल दिया। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री ने फ्रांसीसी हवाई अड्डों पर भारतीय नागरिकों के लिए वीज़ा-मुक्त पारगमन सुविधा के शीघ्र क्रियान्वयन हेतु राष्ट्रपति मैक्रों को धन्यवाद दिया। उन्होंने दोनों देशों के बीच प्रतिभाओं और विद्यार्थियों के आवागमन को बढ़ाने तथा शैक्षिक योग्यताओं की पारस्परिक मान्यता का विस्तार करने के उपायों पर भी चर्चा की। प्रधानमंत्री ने नई शिक्षा नीति के अंतर्गत फ्रांसीसी विश्वविद्यालयों को भारत में अपने परिसर स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया। नेताओं ने लोथल स्थित राष्ट्रीय समुद्री विरासत परिसर सहित संग्रहालयों और सांस्कृतिक संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।दोनों पक्षों ने पश्चिम एशिया और यूक्रेन की स्थिति सहित वैश्विक महत्व के विभिन्न विषयों पर अपने विचारों का आदान-प्रदान किया।

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति मैक्रों ने फ्रांसीसी कलाकार तिबो दे ला लांस और थियोफिल दे बाशे द्वारा भारत के जयपुर में 10 दिवसीय कला आवास कार्यक्रम के दौरान निर्मित कलाकृतियों का भी अवलोकन किया। इन कलाकारों ने भारतीय विरासत और सौंदर्यबोध से प्रेरणा प्राप्त की, जिसके परिणामस्वरूप ऐसी कलाकृतियाँ बनीं जो भारत और फ्रांस के सांस्कृतिक संगम को प्रतिबिंबित करती हैं।वार्ता के बाद राष्ट्रपति मैक्रों ने प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में दोपहर भोज का आयोजन किया।

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