
नयी दिल्ली, 15 जून। कांग्रेस ने अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में शांति बहाली के प्रस्तावित समझौते का स्वागत करते हुए सोमवार को कहा कि यह घटनाक्रम और इसमें पाकिस्तान की बढ़ती भूमिका भारत की कूटनीतिक स्थिति तथा विदेश नीति को लेकर सवाल खड़े करती है।कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी जयराम रमेश तथा विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने प्रस्तावित समझौते पर कहा कि इससे क्षेत्र में स्थायी शांति और सामान्य स्थिति बहाल होने की उम्मीद तो जगी है लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर और तुर्किये जैसे देशों की सक्रियता के मुकाबले भारत प्रभावी भूमिका निभाता नजर नहीं आया।
उन्होंने कहा कि 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के बाद भारत ने पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग- थलग करने में सफलता मिली थी लेकिन अब वही देश क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर नया प्रभाव हासिल करता दिखाई दे रहा है। उनका कहना था कि चीन के साथ पाकिस्तान की गहरी रणनीतिक साझेदारी भारत की विदेश नीति के लिए गंभीर भू-राजनीतिक चुनौती बन गई है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राष्ट्रीय हितों की दृष्टि से भारत को अधिक संतुलित तथा प्रभावी कूटनीतिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता है।उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर इजरायल के प्रति एकतरफा समर्थन का आरोप लगाते हुए कहा कि मानवीय सरोकारों और भारत के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए विदेश नीति में अधिक संतुलन की जरूरत है।
दोनों नेताओं ने कहा कि इस समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के निर्बाध रूप से खुलने से भारत को राहत मिलेगी लेकिन इससे अर्थव्यवस्था के सामने मौजूद संरचनात्मक चुनौतियां समाप्त नहीं होंगी। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार चीन से बढ़ते आयात, निवेश के कमजोर माहौल और वास्तविक मजदूरी में ठहराव जैसी समस्याओं से प्रभावी ढंग से नहीं निपट सकी है