पीएम आवास योजना में बड़ा घोटाला, गरीबों के हक़ पर डाका डाला: वंशराज दुबे

पीएम आवास योजना में बड़ा घोटाला, गरीबों के हक़ पर डाका डाला: वंशराज दुबे

लखनऊ, 15 जून। प्रधानमंत्री आवास योजना में उत्तर प्रदेश के 427 लाभार्थियों द्वारा अलग-अलग निवास और पहचान दिखाकर दो-दो आवास हासिल करने के खुलासे पर आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता वंशराज दुबे ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ योजना में गड़बड़ी नहीं बल्कि गरीबों और जरूरतमंदों के अधिकारों की खुली लूट है। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की जांच में सामने आया यह मामला साबित करता है कि प्रदेश में सुशासन और पारदर्शिता के दावे केवल कागजों और विज्ञापनों तक सीमित हैं जबकि जमीन पर भ्रष्टाचार का संगठित नेटवर्क काम कर रहा है।

आम आदमी पार्टी के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता वंशराज दुबे ने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीबों को पक्का घर उपलब्ध कराने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन उत्तर प्रदेश में इसका लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचने के बजाय फर्जीवाड़े और साठगांठ का शिकार हो गया। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की जांच में प्रदेश के 427 ऐसे लोगों की पहचान हुई है जिन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) और प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) दोनों का लाभ उठाकर दो-दो आवास हासिल कर लिए। ललितपुर में 50, बांदा में 26, सीतापुर और प्रतापगढ़ में 21-21 मामलों का सामने आना बताता है कि यह कोई इक्का-दुक्का गलती नहीं बल्कि सुनियोजित भ्रष्टाचार है।

वंशराज दुबे ने कहा कि आज उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और विभागीय अधिकारी रिकवरी और कार्रवाई की बातें कर रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब यह फर्जीवाड़ा हो रहा था, जब अलग-अलग पते और पहचान दिखाकर आवेदन स्वीकृत किए जा रहे थे, तब सरकार की डिजिटल मॉनिटरिंग व्यवस्था, सत्यापन तंत्र और जांच एजेंसियां आखिर क्या कर रही थीं। बिना विभागीय अधिकारियों, स्थानीय प्रभावशाली लोगों और राजनीतिक संरक्षण के इतना बड़ा खेल संभव ही नहीं है।

उन्होंने कहा कि पूरे देश में दोहरे आवास लेने के 8047 मामलों में उत्तर प्रदेश सातवें स्थान पर पहुंच गया है। यह योगी सरकार के पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त शासन के दावों पर करारा तमाचा है। जिस प्रदेश का गरीब परिवार वर्षों तक एक पक्के मकान की उम्मीद में सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाता रहता है, उसी प्रदेश में कुछ लोग दो-दो सरकारी आवास लेकर गरीबों के हिस्से का अधिकार हड़प लेते हैं। यह केवल सरकारी धन की बर्बादी नहीं बल्कि हजारों गरीब परिवारों के सपनों और अधिकारों की चोरी है।

वंशराज दुबे ने कहा, “यह बेहद शर्मनाक है कि जहां प्रदेश का गरीब, मजदूर और जरूरतमंद परिवार एक अदद पक्के मकान के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटते-काटते थक जा रहा है, वहीं दूसरी ओर साठगांठ करके 427 लोग दो-दो बार आवास का लाभ उठा ले रहे हैं। यह सिर्फ तकनीकी गड़बड़ी नहीं, बल्कि उन हजारों गरीब परिवारों के हक पर सीधा डाका है जो आज भी खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।”

उन्होंने कहा कि केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय की जांच ने यह साबित कर दिया है कि उत्तर प्रदेश में सुशासन के नाम पर केवल प्रचार किया जा रहा है जबकि जमीन पर भ्रष्टाचार का डबल इंजन पूरी रफ्तार से दौड़ रहा है। यदि सरकार वास्तव में पारदर्शिता और जवाबदेही में विश्वास करती है तो उसे केवल कागजी कार्रवाई और रिकवरी तक सीमित नहीं रहना चाहिए।

अंत में वंशराज दुबे ने मांग की कि प्रधानमंत्री आवास योजना में हुए इस पूरे घोटाले की समयबद्ध, निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। केवल छोटे कर्मचारियों को बलि का बकरा बनाकर मामले को दबाने की कोशिश न की जाए बल्कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे बैठे बड़े अधिकारियों, जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों और सफेदपोश संरक्षणकर्ताओं की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए ताकि भविष्य में गरीबों के हक पर कोई डाका डालने की हिम्मत न कर सके।

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