
लखनऊ, 30 जुलाई । उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के अध्यक्ष को पत्र लिखकर प्रदेश में पत्रकारों, डिजिटल मीडिया कर्मियों और स्वतंत्र रिपोर्टरों के विरुद्ध बढ़ती आपराधिक कार्यवाहियों की स्वतंत्र जांच कराने तथा आयोग से आवश्यक हस्तक्षेप की मांग की है। श्री राय ने गुरुवार को जारी पत्र में कहा कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(क) के तहत प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तथा स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पत्रकारिता लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि यदि पत्रकार जनहित के मुद्दों पर निर्भय होकर रिपोर्टिंग नहीं कर पाएंगे तो इसका प्रतिकूल प्रभाव केवल मीडिया पर ही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व और नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों पर भी पड़ेगा।उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में पत्रकारों, डिजिटल मीडिया कर्मियों और स्वतंत्र रिपोर्टरों के विरुद्ध दर्ज आपराधिक मुकदमों तथा पुलिस कार्रवाई की अनेक घटनाएं राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रही हैं। उन्होंने कहा कि एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे), वरिष्ठ विधिवेत्ताओं, पत्रकार संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भी समय-समय पर पत्रकारों के विरुद्ध दर्ज मामलों और पुलिस कार्रवाई पर चिंता व्यक्त की है।
श्री राय ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से वर्ष 2020 से अब तक उत्तर प्रदेश में पत्रकारों, डिजिटल मीडिया कर्मियों और स्वतंत्र रिपोर्टरों के विरुद्ध दर्ज सभी आपराधिक मामलों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने आयोग से उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस महानिदेशक से इन मामलों का समेकित प्रतिवेदन तलब करने तथा यह परीक्षण कराने का अनुरोध किया कि क्या पत्रकारों के विरुद्ध आपराधिक कानूनों के प्रयोग की ऐसी प्रवृत्ति विकसित हुई है, जिससे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और स्वतंत्र पत्रकारिता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा हो।उन्होंने यह भी मांग की कि आयोग एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स (सीपीजे) तथा उत्तर प्रदेश के मान्यता प्राप्त पत्रकार संगठनों से विशेषज्ञ राय प्राप्त कर आवश्यक अनुशंसाएं जारी करे, ताकि पत्रकारों की संवैधानिक स्वतंत्रता और सुरक्षा प्रभावी ढंग से सुनिश्चित की जा सके।