
मथुरा, 30 जुलाई । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के वरिष्ठ अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (एमआरएम) के मुख्य मार्गदर्शक डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि भारतीय मुसलमान न विदेशी है, न बाहरी और न ही पराया, बल्कि वह उतना ही हिंदुस्तानी है जितना कोई अन्य नागरिक। उन्होंने सामाजिक सौहार्द, राष्ट्रीय एकता और सकारात्मक राजनीति पर बल देते हुए सभी समुदायों से परस्पर सम्मान और सहयोग की अपील की। गुरुवार को मथुरा में पत्रकारों से बातचीत में डॉ. कुमार ने कहा कि मुस्लिम समाज के साथ हुए संवाद के दौरान अधिकांश लोगों ने इस बात पर सहमति जताई कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने-अपने मत और पंथ का पालन करने के साथ-साथ दूसरों के धर्म और विचारों का भी सम्मान करना चाहिए।उन्होंने कहा, “त्योहारों पर एक-दूसरे के आयोजनों में सहयोग करना चाहिए, न कि विद्वेष फैलाकर विवाद पैदा करना चाहिए। जब सभी मिलकर त्योहार मनाएंगे तो सामाजिक सद्भाव भी बढ़ेगा और व्यापारिक गतिविधियों को भी लाभ मिलेगा।”
राष्ट्रीय प्रतीकों के संदर्भ में उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ मातृभूमि के प्रति सम्मान और अभिनंदन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में मुसलमान ‘वंदे मातरम्’ गाते हैं और राष्ट्र को सर्वोपरि मानते हैं। उनके अनुसार, “नेशन फर्स्ट, नेशन लास्ट, नेशन ऑलवेज” भारतीय मुसलमान की वास्तविक प्रतिबद्धता है।कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों पर टिप्पणी करते हुए डॉ. इंद्रेश कुमार ने कहा कि राजनीति में नफरत की बजाय सकारात्मक सोच और संवाद को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष को ऐसी भाषा और आचरण अपनाना चाहिए, जिससे देश की एकता और विकास को बल मिले।
राम मंदिर और सनातन धर्म से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि संबंधित विषयों पर ट्रस्ट, सरकार और संबंधित समितियां परिस्थितियों के अनुसार निर्णय ले रही हैं। उन्होंने कहा कि सनातन धर्म किसी भी प्रकार की बुराई का समर्थन नहीं करता, बल्कि सुधार और परिष्कार का पक्षधर है।