ब्रिक्स एनएसए बैठक में भाग लेने भारत आएंगे चीन के विदेश मंत्री वांग

ब्रिक्स एनएसए बैठक में भाग लेने भारत आएंगे चीन के विदेश मंत्री वांग

बीजिंग, 18 जून ।चीन के विदेश मंत्री वांग यी 22-23 जून को भारत की यात्रा करेंगे और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के निमंत्रण पर ब्रिक्स देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों एवं राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के उच्च प्रतिनिधियों की सोलहवीं बैठक में भाग लेंगे।चीन के विदेश मंत्रालय ने बताया कि श्री वांग भारत की मेजबानी में आयोजित इस उच्चस्तरीय सुरक्षा संवाद में शामिल होंगे। भारत 2026 में “नवाचार, सहयोग और सतत विकास के निर्माण” विषय के साथ ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा है।

बैठक में रूस की सुरक्षा परिषद के सचिव सर्गेई शोइगु के भी शामिल होने की संभावना है। इस बैठक में सदस्य देशों के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी वैश्विक और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करेंगे।ब्रिक्स एनएसए बैठक ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने युद्धविराम को 60 दिन और बढ़ाने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने एवं ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर वार्ता शुरू करने के लिए प्रारंभिक समझौते पर हस्ताक्षर किये हैं। यह यात्रा मई में नयी दिल्ली में हुई ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद हो रही है, जिसमें राजनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की गयी थी। मंत्रियों ने बहुपक्षवाद, संयुक्त राष्ट्र केंद्रित व्यवस्था और वैश्विक शासन सुधारों के प्रति समर्थन दोहराया था। ईरान युद्ध को लेकर सदस्य देशों के बीच मतभेदों के बावजूद दो दिन की चर्चा के बाद संयुक्त वक्तव्य भी जारी किया गया था।

ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के साथ शुरू हुए ब्रिक्स समूह में अब मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया तक शामिल हो चुके हैं। यह मंच उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच समन्वय के प्रमुख माध्यम के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर रहा है।भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता की प्राथमिकताओं में नवाचार आधारित विकास, सतत विकास, डिजिटल संपर्क, ऊर्जा परिवर्तन और विकासशील देशों की क्षमता सुदृढ़ करना शामिल है।

श्री वांग की यात्रा को भारत-चीन संबंधों में धीरे-धीरे आ रहे सुधार के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। हाल के वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच बहुपक्षीय मंचों पर कई उच्चस्तरीय बैठकें हुई हैं, जिनमें 2025 में तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन और 2024 में कजान में हुई बैठकें शामिल हैं।भारत के विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों देशों ने हाल में सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाये रखने तथा मतभेदों को विवाद में नहीं बदलने पर जोर दिया है। दोनों पक्षों ने यह भी रेखांकित किया है कि स्थिर भारत-चीन संबंध न केवल दोनों देशों के विकास बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Designed and Developed by Prakhar Dixit