
तेहरान, 18 जून । ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला मुजतबा खामेनेई ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि भविष्य में होने वाली प्रत्यक्ष वार्ताओं का अर्थ शत्रु पक्ष की शर्तों को स्वीकार करना नहीं है।
सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी एक संदेश में उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका के राष्ट्रपतियों के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये जा चुके हैं। इस स्तर तक पहुंचने के लिए संबंधित अधिकारियों ने सद्भावनापूर्ण और गंभीर प्रयास किये हैं। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने भी ‘हताशा में’ समझौते तक पहुंचने के लिए हर संभव दबाव और साधनों का इस्तेमाल किया।
आयतुल्ला खामेनेई ने कहा कि इस समझौते को लेकर उनकी व्यक्तिगत राय अलग थी, लेकिन सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष के रूप में राष्ट्रपति ने उन्हें ईरानी जनता और ‘प्रतिरोध मोर्चे’ के अधिकारों की रक्षा का आश्वासन दिया था। इसी प्रतिबद्धता के आधार पर उन्होंने इसकी अनुमति दी।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि अमेरिकी पक्ष किसी प्रकार की अत्यधिक या अस्वीकार्य मांग करता है तो ईरान उसे स्वीकार नहीं करेगा।
आयतुल्ला खामेनेई ने कहा, “अब हम और ईरान की गौरवशाली जनता यह देखेंगे कि इन शर्तों को किस प्रकार लागू किया जाता है।”
उन्होंने कहा कि भविष्य में प्रत्यक्ष वार्ताएं होने का यह अर्थ नहीं है कि ईरान विरोधी पक्ष के दृष्टिकोण या शर्तों को स्वीकार कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ईरानी राष्ट्र को आगे भी सफलता और विजय प्राप्त होगी।