
अयोध्या, 19 जून । उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को अयोध्या, श्रीराम जन्मभूमि और सनातन परंपरा को लेकर विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार करते हुये कहा कि जो लोग कभी रामलला के दर्शन करने अयोध्या नहीं आए, वे आज रामभक्ति की बात कर रहे हैं।मणिरामदास छावनी के महंत एवं श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास जी महाराज के 88वें जन्मोत्सव समारोह के मौके पर उन्होंने कहा कि मंदिर के चढ़ावे को लेकर सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) पूरे मामले में “दूध का दूध और पानी का पानी” कर देगी।
योगी ने कहा कि जब-जब भारत ने सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ने का प्रयास किया है, तब-तब राष्ट्रविरोधी शक्तियां सक्रिय होकर विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण को बाधित करने की कोशिश करती रही हैं। उन्होंने कहा कि अयोध्या को बदनाम करने और राम जन्मभूमि आंदोलन की उपलब्धियों पर प्रश्नचिह्न लगाने के प्रयास भी उसी सोच का हिस्सा हैं।समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने रामभक्तों पर लाठियां और गोलियां चलवाईं, भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाए और अदालतों में उनके अस्तित्व को मिथक बताया, वही लोग आज रामभक्ति का दावा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे दोहरे चरित्र वाले लोगों से सावधान रहने की आवश्यकता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर एसआईटी गठित की जा चुकी है और जांच निष्पक्ष तरीके से होगी। उन्होंने लोगों से धैर्य रखने की अपील करते हुए कहा कि 500 वर्षों तक संघर्ष करने वाले समाज को कुछ दिनों का इंतजार करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए।कुंभ और सनातन परंपरा का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोग सनातन धर्म और धार्मिक आयोजनों पर लगातार सवाल उठाते हैं, जबकि संगम पर संत और सफाईकर्मी दोनों समान रूप से स्नान करते हैं। उन्होंने कहा कि आज अयोध्या विश्वभर में श्रद्धा और आस्था का केंद्र बन चुकी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में अयोध्या का स्वरूप पूरी तरह बदल गया है। पहले यहां संकरी गलियां, गंदगी और अव्यवस्था थी, जबकि आज यह विश्वस्तरीय धार्मिक नगरी के रूप में विकसित हो रही है। उन्होंने इस परिवर्तन का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और करोड़ों रामभक्तों की आस्था को दिया।अपने संबोधन में योगी ने कहा कि अयोध्या, काशी, मथुरा और प्रयागराज जैसी धार्मिक नगरी भारत की सांस्कृतिक पहचान हैं और इनके गौरव को किसी भी कीमत पर कम नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार धर्म और राष्ट्रहित के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम में रामकथा मर्मज्ञ संत मैथिलीशरण मिथिलेश नंदिनी शरण दास, जगद्गुरु रामानुजाचार्य, स्वामी विद्याभास्कर जी महाराज, महंत कमल नयन दास, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, राज्यसभा सांसद डॉ. दिनेश शर्मा सहित अनेक संत-महात्मा और गणमान्य लोग उपस्थित रहे।