उप्र विधानसभा चुनाव में गौ सम्मान बन सकता है प्रमुख मुद्दा: अविमुक्तेश्वरानंद

उप्र विधानसभा चुनाव में गौ सम्मान बन सकता है प्रमुख मुद्दा: अविमुक्तेश्वरानंद

सहारनपुर, 22 जून। ज्योतिष पीठाधीश्वर एवं जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा है कि उनकी गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश में गौमाता के प्रति हिंदू समाज की गहरी आस्था और समर्थन स्पष्ट रूप से देखने को मिला है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में गौ संरक्षण और गौमाता का सम्मान एक प्रमुख मुद्दा बन सकता है। सहारनपुर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि तीन मई को गोरखपुर से शुरू हुई 81 दिवसीय गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा के दौरान उन्हें प्रदेश की 225 विधानसभा क्षेत्रों में व्यापक जनसमर्थन मिला। उन्होंने कहा कि यात्रा शुरू करने से पहले उन्हें आशंका थी कि आधुनिक जीवनशैली के कारण लोगों की गौमाता के प्रति भावनाएं कमजोर हो गई होंगी, लेकिन अनुभव इसके विपरीत रहा।उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में लोगों ने गौमाता को राष्ट्रमाता अथवा कम से कम राज्य स्तर पर राज्यमाता का दर्जा देने की मांग की है। उनके अनुसार विभिन्न समुदायों के लोग भी गौ संरक्षण और गौवंश के सम्मान के पक्ष में अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।

शंकराचार्य ने कहा कि यदि 24 जुलाई तक उत्तर प्रदेश सरकार गौमाता को राज्यमाता का दर्जा नहीं देती है तो लखनऊ में एक विशाल जनसभा आयोजित कर आगे की रणनीति की घोषणा की जाएगी। उन्होंने बताया कि उनकी यात्रा 22 जुलाई को लखनऊ पहुंचेगी।एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि उनकी यात्रा को विभिन्न वर्गों और संगठनों का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने कहा कि गौ संरक्षण का विषय किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रदेश की वर्तमान परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि गौ संरक्षण, गौवंश की स्थिति और अन्य सामाजिक मुद्दों पर व्यापक चर्चा की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि समाज में गौमाता के सम्मान और संरक्षण को लेकर गंभीर प्रयास किए जाने चाहिए।योग गुरु स्वामी रामदेव के संबंध में पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने कहा कि विभिन्न संतों और सामाजिक हस्तियों की अपनी-अपनी कार्यशैली और प्राथमिकताएं हैं। उन्होंने रामदेव के कुछ पुराने राजनीतिक और सामाजिक रुखों का भी उल्लेख किया।

अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर से जुड़े एक प्रश्न के उत्तर में शंकराचार्य ने कहा कि मंदिर प्रबंधन से संबंधित मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता हुई है तो दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाएगी और जांच के बाद सच्चाई सामने आएगी।उन्होंने कहा कि उनकी गौरक्षार्थ धर्मयुद्ध यात्रा का उद्देश्य गौ संरक्षण, गौसंवर्धन और समाज में जागरूकता बढ़ाना है तथा यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

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