
नयी दिल्ली, 22 जून। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दुनिया में उत्पन्न भू-राजनीतिक संकटों के बीच अपनी सरकार के रूख के बारे में सोमवार को स्पष्ट किया कि ‘राष्ट्रहित प्रथम’ उनके लिए मूल मंत्र है तथा आज दुनिया इस बात को अच्छी तरह समझ चुकी है।श्री मोदी एक निजी टीवी समाचार चैनल के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने 12 वर्ष पूरे कर लिए है और इस दौरान इसी सिद्धांत को ऊपर रख कर काम करते हुए नक्सलवाद का सफाया किया गया है, पिछड़े जिलों को आकांक्षी जिला घोषित कर उन्हें विकास की राह पर आगे बढ़ाते हुए 25 करोड़ गरीब लोगों को गरीबी पर विजय दिलवायी गयी है, बुनियादी सुविधाओं का विस्तार हुआ है, देश में नयी आशा का संचार हुआ है।
उन्होंने कांग्रेस पर हमला करते हुए कहा कि उसके दौर में कि नक्सलवाद प्रभावित क्षेत्रों में संविधान की बात करने वालों को गोली मार दी जाती थी, और आज जो लोग हाथ में संविधान लेकर घूम रहे हैं , ऐसी घटनाओं मौन बने रहते थे और (संविधान उठाने) में उस समय उनके हाथ कांपते थे।प्रधानमंत्री ने वैश्विक मंच पर आज के भारत के दृष्टिकोण और रुख को स्पष्ट करते हुए कहा , ‘ अभी मैं दो-तीन दिन पहले जी-7 शिखर बैठक (फ्रांस) से लौटा हूं और दुनिया का हर नेता, हर देश इस बात को भलीभांति समझता है कि आज के भारत के लिए नेशन फर्स्ट (अपने देश का हित सबसे ऊपर) ही सबसे बड़ा मंत्र है, सबसे बड़ा सिद्धांत है।”
श्री मोदी ने कहा कि भारत कोई भी फैसला उतावलेपन में नहीं बल्कि अपने ऐतिहासिक अनुभावों के आधार पर करता है। उन्होंने कहा, ‘भारत की विशेषता है कि हम किसी क्षणिक घटना पर उतावले होने वाले देश नहीं हैं। हम वह हैं जिसने विकास और विनाश देखा भी है, झेला भी है। हम वो देश हैं, जिसके जेहन में युगों की मेमोरी चिप लगी हुई है।”उन्होंने इसी संदर्भ में कहा, ‘ इसलिए भारत जो कर रहा है- वह आने वाले 1000 वर्ष का फ्यूचर लिखने वाला है और यही दुनिया के लिए सबसे बड़ी भारत की गारंटी है।” उन्होंने यह भी कहा कि आज भारत, सबसे तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था भी है और एक भरोसेमंद अर्थव्यवस्था भी है। ” भारत उभरती ताकत के साथ साथ भरोसेमंद ताकत है।’
उन्होंने आतकवाद पर कामयादी की अपनी सरकार की उपलब्धि और उसके पीछे की योजनाओं ओर कार्यक्रमों का विस्तार से जिक्र करते हुए कहा कि 2014 से पहले , ‘ इस 21वीं सदी में भी आतंकियों ने आदिवासी इलाकों में एक भी सुविधा नहीं पहुंचने दी थी । एक सरकारी गाड़ी नहीं गुजर सकती थी। गोलियों से भून दिया जाता था। अनेक सरकारें आयी गयी… कई पीढ़ियां आयी गयी… लगता था कि हिंसा का ये दुर्भाग्य ऐसा ही रहेगा।”उन्होंने कहा कि 2004 से 2014 के बीच माओवादी आतंक के कारण 17 हजार से भी अधिक हिंसक घटनाएं हुई थीं और करीब करीब 7 हजार से ज्यादा जानें गई थीं।
श्री मोदी ने कहा, ‘ 2014 के बाद हम हालात को बदलने के लिए राष्ट्र प्रथम के संकल्प के साथ आगे बढ़े। आज देश में माओवादी आतंक, अपनी अंतिम सांसें गिन रहा है। यह इसलिए हो पाया… क्योंकि इसके लिए खपना पड़ता है। आज जो लोग हाथ में संविधान लेकर दिखा रहे हैं, उस समय संविधान दिखाने में इनकी हाथ कांप रहे थे।”प्रधानमंत्री ने कहा , ‘ कुछ दिन पहले ही हमारी सरकार को 12 साल पूरे हो चुके हैं। पिछले 12 वर्षों के जो भी सिद्धियां देश की रही है, अगर आप तराजू से तौलोगे तो हर निर्णय, हर कदम, हर प्रयास… उनके मूल में राष्ट्र प्रथम की भावना ही केंद्र में है।”
उन्होंने कहा कि स्वच्छ भारत अभियान से लेकर मेक इन इंडिया, खादी और स्थानीय वस्तुएं खरीदने पर जोर… ये सारे इनिशिएटिव ‘कदम’ इसलिए सफल हुए, क्योंकि देश की जनता ने देश को सबसे ऊपर रखते हुए अपना कर्तव्य निभाया… इसके लिए उन्होंने देशवासियों का आभार जताया।