उत्तर प्रदेश में बिजली की नई दरों का ऐलान कभी भी हो सकता है: उपभोक्ता परिषद

उत्तर प्रदेश में बिजली की नई दरों का ऐलान कभी भी हो सकता है: उपभोक्ता परिषद

लखनऊ, 26 जून। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने दावा किया है कि प्रदेश में वर्ष 2026-27 की वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) एवं विद्युत दर निर्धारण प्रक्रिया की सभी जनसुनवाई और राज्य सलाहकार समिति की बैठकें पूरी हो चुकी हैं। इसलिये अब उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग द्वारा नई बिजली दरों की घोषणा कभी भी की जा सकती है। परिषद ने यह भी दावा किया है कि इस बार बिजली कंपनियों द्वारा प्रस्तावित दर वृद्धि के प्रयासों का तथ्यों के आधार पर विरोध किया गया है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने शुक्रवार को कहा कि परिषद को उम्मीद है कि इस बार भी आयोग उपभोक्ताओं के हित में संतुलित एवं न्यायसंगत निर्णय देगा। उन्होंने दावा किया कि परिषद के लगातार प्रयासों के कारण प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के पक्ष में 51 हजार करोड़ रुपये से अधिक का सरप्लस है और इसी के चलते पिछले छह वर्षों से बिजली दरों में कोई वृद्धि नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि परिषद विशेष रूप से नोएडा पावर कंपनी लिमिटेड (एनपीसीएल) के उपभोक्ताओं को मिलने वाले 10 प्रतिशत रिबेट को बनाए रखने के मुद्दे पर सतर्क है और इसे समाप्त नहीं होने देने के लिए प्रयासरत है।वर्मा ने बताया कि बिजली वितरण कंपनियों ने वर्ष 2024-25 के ट्रू-अप में लगभग 3,995 करोड़ रुपये तथा वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 12,453 करोड़ रुपये का राजस्व अंतर (रेवेन्यू गैप) दर्शाया है। इस प्रकार कुल लगभग 16,448 करोड़ रुपये के राजस्व अंतर के आधार पर बिजली दरों में वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया है, जिसका परिषद ने तथ्यों एवं आंकड़ों के आधार पर विरोध किया है।

उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं पर अनावश्यक वित्तीय बोझ डालने के प्रयासों को रोकने के लिए परिषद ने सभी वैधानिक एवं नियामकीय मंचों पर अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखा है। इसके अलावा स्मार्ट प्रीपेड मीटरिंग योजना के तहत लगभग 3,838 करोड़ रुपये की लागत को उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में शामिल करने के प्रयासों पर भी परिषद ने गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है।वर्मा ने कहा कि आने वाला विद्युत दर निर्धारण आदेश उत्तर प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यदि आयोग उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय देता है तो यह देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक सकारात्मक उदाहरण होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आयोग सभी तथ्यों, आपत्तियों और जनहित को ध्यान में रखते हुए ऐसा निर्णय देगा, जिससे प्रदेश के करोड़ों बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।

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