
लखनऊ, 28 जून (वार्ता) उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग (यूपीईआरसी) द्वारा ईंधन एवं विद्युत क्रय लागत समायोजन (एफपीपीसीए) के मामले में पारित आदेश के बाद प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को जुलाई माह में अब तक का सबसे बड़ा लाभ मिलने की संभावना जताई गई है।उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कहा कि अब उसकी नजर उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) द्वारा आयोग के आदेश के अनुपालन में जारी किए जाने वाले आदेश पर टिकी है।
परिषद के अनुसार यूपीईआरसी ने एफपीपीसीए के मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पावर कॉरपोरेशन को पूरी प्रक्रिया कानून के अनुरूप, पारदर्शी और नियमानुसार लागू करने के निर्देश दिए हैं। परिषद ने इस संबंध में आयोग के समक्ष लोकमहत्व प्रस्ताव दाखिल कर विस्तृत शिकायत प्रस्तुत की थी, जिसके बाद आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए आवश्यक निर्देश जारी किए।उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने रविवार को कहा कि परिषद द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार जुलाई माह के एफपीपीसीए समायोजन में प्रदेश के लाखों बिजली उपभोक्ताओं को अब तक का सबसे बड़ा लाभ मिलने की संभावना है। उन्होंने कहा कि आयोग के आदेश का प्रभाव इस बार स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।
उन्होंने कहा कि कानून की परिधि में कार्य होने पर हमेशा उपभोक्ताओं को लाभ मिलता है, लेकिन जब भी पावर कॉरपोरेशन कानून का उल्लंघन करता है, तब उपभोक्ताओं को नुकसान उठाना पड़ता है। उनका कहना था कि यदि पावर कॉरपोरेशन से कहीं भी गलती हुई है तो उसे उसके परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा और उपभोक्ता परिषद इस लड़ाई को अंतिम अंजाम तक ले जाएगा।परिषद ने बताया कि उसने पिछले 14 माह की एफपीपीसीए गणना में कथित त्रुटियों के कारण उपभोक्ताओं से लगभग 2,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त वसूली का लाभ वापस दिलाने के लिए भी यूपीईआरसी में लोकमहत्व प्रस्ताव दाखिल किया है। परिषद को विश्वास है कि आयोग इस मामले में भी न्यायोचित निर्णय लेते हुए प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करेगा।
परिषद ने कहा कि वह भविष्य में भी बिजली उपभोक्ताओं के अधिकारों की रक्षा तथा विद्युत व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित कराने के लिए लगातार प्रयास करता रहेगा।