
लखनऊ, 13 अगस्त । उत्तर प्रदेश सरकार स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन के मानचित्र पर नई पहचान दिलाने के लिए ‘स्वतंत्रता संग्राम सर्किट’ का विस्तार कर रही है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने गुरुवार को बताया कि पर्यटन विभाग का उद्देश्य इन स्थलों को केवल स्मारकों तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि उन्हें ऐसे आकर्षक पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित करना है, जहां पर्यटक स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को करीब से जान और महसूस कर सकें। इसके लिए बेहतर कनेक्टिविटी, वे-फाइंडिंग, सौंदर्यीकरण, पर्यटक सुविधाओं तथा व्याख्या केंद्रों का विकास किया जा रहा है।उन्होंने बताया कि वाराणसी के पिंडरा क्षेत्र स्थित करखियांव गांव में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े स्थल के विकास के लिए 18.26 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। यहां शहीद हुए 26 लोगों की स्मृति में म्यूरल पार्क का निर्माण भी कराया जा रहा है। रायबरेली के मुंशीगंज स्थित शहीद स्मारक स्थल का 4.51 करोड़ रुपये की लागत से विकास किया जा रहा है, जिसका लगभग 85 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है।लखनऊ के उमरिया मजरे मुसपिपरी गांव में अमर शहीद राजा दिग्विजय सिंह स्मारक का विकास किया जा रहा है, जबकि औरैया के ककोर स्थित तिरंगा पार्क को पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। बलिया में लोकनायक जयप्रकाश नारायण की जन्मस्थली सिताबदियारा तथा मंगल पांडेय और वीर कुंवर सिंह से जुड़े स्मारक स्थलों का भी विकास एवं सौंदर्यीकरण कराया गया है।
उन्होंने बताया कि शाहजहांपुर के जसवंतपुर गांव में शहीद करतम सिंह पार्क का निर्माण एवं सौंदर्यीकरण कराया गया है। हरदोई के सेमरिया स्थित शहीद स्थल का भी विकास किया गया है। मेरठ में 1857 की क्रांति से जुड़े स्थलों और शहीद स्मारकों के विकास पर 4.53 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। इसके अलावा भामौरी गांव में संग्रहालय निर्माण का कार्य लगभग पूरा हो चुका है।
सहारनपुर के चकवाली गांव में ‘सुभाष चंद्र बोस भारत सरोवर’ को इको-टूरिज्म परियोजना के तहत विकसित किया जा रहा है। वहीं बुलंदशहर में शहीद नाईक तुला सिंह स्मारक और प्रतिमा परिसर का लगभग एक करोड़ रुपये की लागत से सौंदर्यीकरण कराया गया है।श्री सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम सर्किट के माध्यम से प्रदेश के युवाओं को स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष, त्याग और बलिदान से परिचित कराने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन स्थलों पर आने वाला पर्यटक इतिहास को केवल पढ़े नहीं, बल्कि आजादी के आंदोलन और देशभक्ति की भावना को महसूस भी कर सके।उन्होंने कहा कि आजादी की विरासत को पर्यटन से जोड़ने की यह पहल न केवल ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण में सहायक होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित करेगी।