
लखनऊ, 28 सितंबर। उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री एवं सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने सोमवार को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विपक्षी दलों के आरोपों पर कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन आरोप लगाने वालों को उसके प्रमाण भी देने चाहिए।
श्री राजभर ने यहां सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि एक भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से नहीं हटना चाहिए। यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची से हट गया है तो इसकी जानकारी निर्वाचन आयोग को दी जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘विरोध करना है तो कीजिए, लेकिन लोकतांत्रिक तरीके से कीजिए। आरोप लगा रहे हैं तो प्रमाण भी दीजिए।’’
उन्होंने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस से सवाल करते हुए कहा कि वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में सपा के 36 और कांग्रेस के छह सांसद निर्वाचित हुए थे, तब चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल क्यों नहीं उठाए गए। उन्होंने कहा कि यदि कहीं कोई गड़बड़ी दिखाई दे रही है तो विपक्ष उसके प्रमाण सामने रखे।
राजभर ने कहा कि जनता चुनाव में फैसला करती है और निर्वाचन आयोग चुनाव प्रक्रिया संचालित करता है। उन्होंने कहा कि पहले विपक्षी दलों ने ईवीएम को लेकर आरोप लगाए, लेकिन जब उन्हीं ईवीएम से चुनाव जीतने लगे तो जनता ने उन आरोपों को स्वीकार नहीं किया। अब संवैधानिक चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जिन मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी है अथवा जो संबंधित विधानसभा क्षेत्र से स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए हैं, उनके नाम मतदाता सूची से हटाए जाने की प्रक्रिया होनी चाहिए। हालांकि उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे नामों का इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी मतदान के लिए किया जाता रहा है।
बसपा अध्यक्ष मायावती की ओर से ईवीएम के स्थान पर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग पर राजभर ने कहा कि चुनाव जीतने वाले विपक्षी सांसदों और विधायकों को पहले अपने पदों से इस्तीफा देना चाहिए और उसके बाद चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाना चाहिए।
उन्होंने नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद को लेकर भी दावा किया कि वह कांग्रेस प्रत्याशी का पर्चा खारिज होने के कारण चुनाव जीते।
राजभर ने परिवारवाद के आरोपों पर कहा कि यदि परिवार के किसी व्यक्ति को केवल रिश्ते के आधार पर खड़ा किया जाता है तो उसे परिवारवाद कहा जा सकता है, लेकिन कोई व्यक्ति लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहा है और उसे जिम्मेदारी मिलती है तो इसे परिवारवाद नहीं कहा जा सकता।
उन्होंने कहा कि भारतीय जनता पार्टी जनता के बीच मजबूत संगठन वाली पार्टी है। उन्होंने विपक्षी दलों के गठबंधन पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उसमें शामिल दलों के बीच अलग-अलग मुद्दों को लेकर मतभेद हैं।
वक्फ संपत्तियों के मुद्दे पर राजभर ने कहा कि वक्फ बोर्ड की संपत्तियों की जांच होने पर समाजवादी पार्टी को स्थिति का पता चल जाएगा। नागरिकता संशोधन कानून को लेकर उन्होंने सपा, कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि इन दलों ने दावा किया था कि यह कानून नागरिकता छीनने वाला है, लेकिन कानून लागू होने के बाद वे किसी ऐसे व्यक्ति का नाम बताएं जिसे देश से बाहर किया गया हो।
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए राजभर ने कहा कि ‘‘अखिलेश जी, आपका नुकसान हो रहा है।’’ उन्होंने समाजवादी पार्टी के ‘पीडीए’ को लेकर भी तंज कसते हुए कहा कि ‘‘परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी’’ वाले पीडीए की बात कर रहे हैं। लोहिया ट्रस्ट में परिवार के सदस्यों की मौजूदगी को लेकर भी उन्होंने सपा पर परिवारवाद का आरोप लगाया।