
लखनऊ, 28 सितंबर। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए देश में दोबारा बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की है।
उन्होंने कहा कि मतदाता को इस बात का पूरा भरोसा होना चाहिए कि उसके द्वारा दिया गया वोट उसी प्रत्याशी के पक्ष में दर्ज और मतगणना में शामिल हुआ है, जिसे उसने मतदान किया है।
मायावती ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि संविधान ने देश के प्रत्येक नागरिक को अपने मताधिकार का प्रयोग कर सरकार चुनने का अधिकार दिया है और संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनावों के संचालन की जिम्मेदारी निर्वाचन आयोग को सौंपी गई है।
उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया ऐसी होनी चाहिए जिसमें प्रत्येक मतदाता बिना किसी संदेह के अपनी पसंद के प्रत्याशी को वोट दे सके और उसका मत उसी के पक्ष में गिना जाए।
उन्होंने कहा कि यदि मतदाता को यह संदेह हो कि उसका वोट किसी दूसरे प्रत्याशी के खाते में चला गया या उसकी गणना नहीं हुई तो इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास प्रभावित होगा। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए गंभीर स्थिति बताया।
बसपा प्रमुख ने कहा कि देश में शुरुआती चुनावों से लेकर करीब पांच दशक तक मतदान के लिए बैलेट पेपर का इस्तेमाल किया गया। उस समय मतपत्रों को राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में खोला और गिना जाता था। बाद में बैलेट पेपर की जगह ईवीएम के इस्तेमाल की व्यवस्था शुरू की गई।
मायावती ने कहा कि जब केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी, उस समय भारतीय जनता पार्टी ने भी ईवीएम की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए थे। भाजपा की ओर से तब ईवीएम में लगी इलेक्ट्रॉनिक चिप के साथ छेड़छाड़ की आशंका जताई गई थी और इस संबंध में एक किताब भी प्रकाशित की गई थी।
उन्होंने कहा कि उस समय भाजपा ईवीएम के इस्तेमाल का विरोध करती थी, लेकिन केंद्र में सत्ता में आने के बाद उसी व्यवस्था को जारी रखा गया। उन्होंने कहा कि बसपा शुरू से ही ईवीएम के माध्यम से मतदान का विरोध करती रही है।
मायावती का दावा है कि समाज के गरीब, श्रमिक, दलित, अति पिछड़े और अन्य वंचित वर्गों के बीच ईवीएम को लेकर आशंका बढ़ी है और इससे मतदान प्रक्रिया में उनके विश्वास पर असर पड़ रहा है।
मायावती ने नगीना लोकसभा सीट से आजाद समाज पार्टी के सांसद चंद्रशेखर आजाद की जीत का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि बसपा के समर्थकों में यह धारणा है कि ईवीएम में कथित धांधली के जरिए बसपा को नुकसान पहुंचाकर उन्हें चुनाव जिताया गया। उन्होंने इस दावे को लोगों की धारणा बताते हुए कहा कि नगीना में आजाद समाज पार्टी का कोई मजबूत जनाधार नहीं था।
बसपा प्रमुख ने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता और मतदाताओं के विश्वास को बनाए रखने के लिए ईवीएम के स्थान पर बैलेट पेपर से चुनाव कराने पर विचार किया जाना चाहिए। उन्होंने चुनावों से जुड़े अन्य मुद्दों और देश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर भी अपनी बात रखी।