प्रधान का इस्तीफा मांगने वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे, छह छात्र नेता भी साथ

प्रधान का इस्तीफा मांगने वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे, छह छात्र नेता भी साथ

नयी दिल्ली, 28 जून । पर्यावरण कार्यकर्ता एवं शिक्षाविद् सोनम वांगचुक के साथ छह छात्र नेता केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए रविवार को भूख हड़ताल पर बैठ गये।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) ने इन विद्यार्थियों के भूख हड़ताल में शामिल होने की जानकारी देते हुए कहा, “जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग को लेकर सोनम वांगचुक की अपील पर छह छात्र भूख हड़ताल में शामिल होंगे।”

सोशल मीडिया पर साझा किये गये बयान में कहा गया, “28 जून को दोपहर दो बजे, सात दिनों के विरोध-प्रदर्शन के बाद सोनम वांगचुक ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग करते हुए जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू की। छह छात्र भी इस भूख हड़ताल के समर्थन में आगे आये हैं और उन्होंने जवाबदेही और न्याय मिलने तक ‘आमरण अनशन’ करने का ऐलान किया है।”

बयान के अनुसार, आइसा अध्यक्ष नेहा, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्र संघ के संयुक्त सचिव दानिश, आइसा उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मनीष, आइसा दिल्ली विश्वविद्यालय उपाध्यक्ष दीपक, जेएनयू के बराक हॉस्टल के अध्यक्ष ऋषिकेश और अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली के छात्र परिषद के पूर्व सदस्य आमीन अनशन पर बैठे हैं।

बयान में कहा गया, “छात्रों ने सोनम वांगचुक के आह्वान का पूरा समर्थन करते हुए हड़ताल का ऐलान किया है और वे धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े, नई शिक्षा नीति 2020 को रद्द करने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को खत्म करने की लड़ाई में कंधे से कंधा मिलाकर लड़ेंगे।”

इससे पूर्व, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने बताया कि श्री वांगचुक राष्ट्रीय राजधानी के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठ गये हैं।

श्री दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी संदेश में कहा, “सोनम वांगचुक ने विद्यार्थियों के लिए इंसाफ लेने तथा धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगने के लिए भूख हड़ताल शुरू कर दी है।” इससे पहले श्री वांगचुक राजघाट गये थे। यहां सीजेपी के संस्थापक श्री दिपके और सौरव दास उनके साथ मौजूद थे।

उल्लेखनीय है कि श्री दिपके ने रविवार सुबह 11 बजे लोगों से जंतर-मंतर आने की अपील की थी। उन्होंने एक पोस्ट में यह भी दावा किया था कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब के कई किसान नेताओं को नज़रबंद किया जा रहा है ताकि वे जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन में शामिल न हो सकें।

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