
नयी दिल्ली, 28 जून। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा है कि बाघ संरक्षण केवल एक प्रजाति की रक्षा नहीं, बल्कि वनों, जल स्रोतों और जैव विविधता के संरक्षण का भी आधार है।श्री यादव ने रविवार को राजस्थान के अलवर में “बाघों का पुनर्वास : अवसर और चुनौतियां” विषयक राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए यह बात कही।
उन्होंने कहा कि 2005 में बाघविहीन हो चुके सरिस्का में अब 56 बाघ हैं और यह वैज्ञानिक पुनर्वास की सफलता का उदाहरण है। पिछले एक दशक में देश में बाघ अभयारण्यों की संख्या 46 से बढ़कर 58 हो गई है और देश ने निर्धारित समय से पहले बाघों की संख्या दोगुनी करने का लक्ष्य हासिल किया है।इस अवसर पर श्री यादव ने बाघ संरक्षण और प्रोजेक्ट चीता से संबंधित कई प्रकाशनों का विमोचन भी किया।