भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से मुरादाबाद के निर्यातकों में उम्मीद, हस्तशिल्प उद्योग को मिल सकती है नई रफ्तार

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते से मुरादाबाद के निर्यातकों में उम्मीद, हस्तशिल्प उद्योग को मिल सकती है नई रफ्तार

मुरादाबाद, 02 जुलाई । भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के अंतिम चरण में पहुंचने की खबर से पीतल नगरी मुरादाबाद के निर्यातकों में उत्साह का माहौल है। स्थानीय हस्तशिल्प उद्योग से जुड़े कारोबारियों का मानना है कि समझौता लागू होने के बाद अमेरिकी बाजार में व्यापारिक अवसर बढ़ेंगे और निर्यात क्षेत्र को नई गति मिलेगी।मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट्स एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (एमएचईए) के चेयरमैन नवेद उर रहमान ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता मुरादाबाद के हस्तशिल्प और निर्यात उद्योग के लिए बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका लंबे समय से मुरादाबाद के हस्तशिल्प उत्पादों का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण निर्यात बाजार रहा है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापारिक बाधाएं और शुल्क कम होंगे, जिससे स्थानीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार तक पहुंच और अधिक आसान होगी। इसके साथ ही निर्यात में वृद्धि होने से उद्योग को नई ऊर्जा मिलेगी और बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।निर्यातकों का कहना है कि पिछले कुछ समय से वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के कारण मुरादाबाद का निर्यात क्षेत्र मंदी के दौर से गुजर रहा है। ऐसे में यदि व्यापार समझौता शीघ्र लागू होता है तो यह उद्योग के लिए राहत और विकास का नया अवसर लेकर आएगा।

उल्लेखनीय है कि भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने वाशिंगटन में आयोजित यूएस-इंडिया स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम लीडरशिप समिट में कहा था कि दोनों देशों के बीच पिछले 18 महीनों से चल रही व्यापार वार्ता अब अंतिम चरण में है और अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि शेष बचे मुद्दों पर भी जल्द सहमति बन जाएगी और समझौते को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।मुरादाबाद के निर्यातकों का मानना है कि इस समझौते के लागू होने से न केवल स्थानीय हस्तशिल्प उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच भी और मजबूत होगी। अब उद्योग जगत की निगाहें दोनों देशों के बीच वार्ता के अंतिम निष्कर्ष और समझौते की औपचारिक घोषणा पर टिकी हैं।

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