
नयी दिल्ली, 02 जुलाई। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे पर सड़क धंसने की घटना को लेकर स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा है कि यह घटना भारी बारिश के बाद स्थानीय स्तर पर जलभराव तथा स्थायी जल निकासी प्रणाली चालू नहीं हो पाने के कारण हुई, लेकिन सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से की तत्काल मरम्मत कर इस पर यातायात सुरक्षित और सुचारू संचालन कर दिया गया है।एनएचएआई ने गुरुवार को यहां एक बयान में कहा कि एक जुलाई को दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे पर करीब 55 किलोमीटर दूरी पर एक जुलाई को सड़क की सतह धंसने की घटना सामने आई। उसी दिन सुबह नियमित गश्त के दौरान परियोजना दल ने प्रभावित हिस्से की पहचान की और प्राथमिकता के आधार पर मरम्मत कार्य शुरू कर क्षतिग्रस्त सड़क को दुरुस्त कर दिया है।
प्राधिकरण ने बताया कि संबंधित स्थान पर बनाया गया बैलेंसिंग कल्वर्ट वर्षा जल को सड़क के दूसरी ओर सुरक्षित ढंग से निकालने के लिए तैयार किया गया था, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के कारण इसे स्थायी जल निकासी प्रणाली से जोड़ा और चालू नहीं किया जा सका। स्थानीय निवासी कल्वर्ट के मुहाने का उपयोग वाहन पार करने के लिए करते रहे, जिसके कारण जल निकासी व्यवस्था संचालित नहीं हो सकी। भारी वर्षा के दौरान पानी सड़क पर जमा हो गया और इसके कारण सड़क की सतह धंस गई।एनएचएआई का कहना है कि संबंधित स्थल पर स्थायी ढलान सुरक्षा और ड्रेन का निर्माण भी भूमि संबंधी मध्यस्थता विवाद के कारण लंबित है। भूमि स्वामियों द्वारा कार्य नहीं करने देने के कारण परियोजना में प्रस्तावित स्थायी सुरक्षा उपाय पूरे नहीं किए जा सके।
प्राधिकरण ने यह भी बताया कि स्थिति से निपटने के लिए लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी अंतरिम समानांतर नाली का निर्माण शुरू कर दिया गया है। साथ ही इस स्थान पर जल निकासी की ढाल को फिर से डिजाइन किया जा रहा है, ताकि बैलेंसिंग कल्वर्ट चालू होने तक वर्षा जल को सुरक्षित रूप से प्रवेश एवं निकास बिंदु तक पहुंचाया जा सके।एनएचएआई ने कहा है कि प्रभावित स्थल की लगातार निगरानी की जा रही है और यातायात को सुरक्षित एवं निर्बाध बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक संसाधन तैनात किए गए हैं। भूमि विवाद का समाधान होते ही स्थायी ढलान सुरक्षा और ड्रेन का निर्माण कार्य तत्काल पूरा किया जाएगा। प्राधिकरण ने कहा कि राजमार्गों की सुरक्षा, मजबूती और परिचालन दक्षता बनाए रखना उसकी सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा मौसम संबंधी घटनाओं से निपटने के लिए निरंतर निगरानी, समय पर रखरखाव और त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था जारी रहेगी।