
मुंबई, 06 जुलाई। महाराष्ट्र में मूसलाधार बारिश के बाद मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे ‘मिसिंग लिंक’ प्रोजेक्ट और वेन्ना नदी के पुल समेत कई बुनियादी ढांचों के क्षतिग्रस्त होने से राज्य में गंभीर स्थिति पैदा हो गयी है।मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने प्रभावित हिस्सों पर यातायात सामान्य करने के लिए युद्ध स्तर पर राहत कार्य शुरू कराते हुए यात्रियों से बेहद जरूरी न होने पर इस मार्ग पर यात्रा न करने की अपील की है। दूसरी तरफ इस संकट को लेकर विपक्ष ने महायुति सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने और राज्य में आपातकाल घोषित करने की मांग की है।
श्री फडणवीस ने कहा कि प्रभावित हिस्से पर सामान्य ट्रैफिक गतिविधि बहाल करने के लिए अधिकारियों ने कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रशासन की तुरंत कार्रवाई के बाद, पुणे जाने वाले कैरिजवे की सभी तीन लेन ट्रैफिक के लिए पूरी तरह से खोल दी गयी हैं, जिससे पुणे जाने वाले यात्रियों को काफी राहत मिली है। मुंबई जाने वाले कैरिजवे पर अभी एक ही लेन से ट्रैफिक जाने दिया जा रहा है।मुख्यमंत्री ने कहा कि बाकी लेन को बहाल करने के लिए युद्ध स्तर पर कोशिशें चल रही हैं और अगले डेढ़ घंटे में पूरा हिस्सा चालू होने की उम्मीद है।उन्होंने बताया कि स्थिति नियंत्रण में लाने के लिए कई आपातकालीन राहत दल और सरकारी विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। प्रभावित सड़क का एक बड़ा हिस्सा पहले ही साफ कर दिया गया है, जबकि बाकी मरम्मत का काम तेजी से चल रहा है। लोक निर्माण मंत्री शिवेंद्रराजे भोसले खुद साइट पर मौजूद हैं और मरम्मत कार्य की देखरेख करते हुए इस पूरे अभियान का संचालन कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने चल रहे बहाली कार्य के मद्देनजर लोगों से अपील की है कि जब तक बहुत जरूरी न हो, वे मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर सफर करने से बचें। उन्होंने आने-जाने वालों से ट्रैफिक पुलिस के दिये गये निर्देशों और आधिकारिक सलाह का सख्ती से पालन करने का आग्रह किया है।इस बुनियादी ढांचे के संकट पर महाराष्ट्र के विपक्षी नेताओं ने सरकार को घेरा है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्यकारी अध्यक्ष एवं लोकसभा सांसद सुप्रिया सुले ने मांग की है कि श्री फडणवीस को राज्य में पुल गिरने और उत्पन्न हालात के बाद तुरंत आपातकाल घोषित करना चाहिए। वहीं, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने मांग की है कि पिछले दो-तीन दिनों में मुंबई क्षेत्र में हुई मौतों के लिए श्री फडणवीस जिम्मेदार हैं, इसलिए उनके खिलाफ तुरंत गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे “मिसिंग लिंक” 6,700 करोड़ रुपये का एक मेगा-प्रोजेक्ट है, जिसमें टाइगर वैली पर 182 मीटर ऊंचा केबल-स्टेड ब्रिज है, जिसे दुर्घटना-प्रवण खंडाला घाट को बायपास करने के लिए तैयार किया गया है। इसे हाल ही में मई 2026 में हल्के वाहनों के लिए खोला गया था, लेकिन भारी बारिश के कारण पुल के महत्वपूर्ण हिस्सों के टूटने और लैंडस्लाइड के बाद इसे बंद करना पड़ा। इसके साथ ही, लगातार बारिश के कारण सतारा जिला स्थित महाबलेश्वर में वेन्ना झील के पास वेन्ना नदी पर बना पुल भी गिर गया है, जिससे पर्यटक और स्थानीय निवासी फंस गये हैं।राज्य में मानसून जनित अन्य हादसों का जिक्र करते हुए विपक्षी नेताओं ने कहा कि रविवार को मुंबई के मानखुर्द इलाके में चार मंजिला चॉल गिरने से छह लोगों की मौत हो गयी और एक व्यक्ति घायल हो गया। इसके अलावा मुंबई, ठाणे और पालघर जिलों में लगातार हो रही बारिश से उड़ानें बाधित हुई हैं, सड़कों पर पानी भर गया है और अलंदी में बाढ़ के हालात हैं।
श्री सपकाल ने कहा कि पिछले दो-तीन दिनों में मुंबई इलाके में अलग-अलग घटनाओं में 12 लोगों की जान चली गयी है। यह कोई प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि इंसानों की बनायी आपदा है, क्योंकि बीजेपी की महायुति सरकार और प्रशासन मानसून को लेकर पूरी तरह तैयार नहीं था।गांधी भवन में मीडिया से बात करते हुए श्री सपकाल ने आरोप लगाया कि सरकार ने इस मिसिंग लिंक परियोजना पर 7,181 करोड़ रुपये खर्च किये, फिर भी इसके उद्घाटन के मुश्किल से दो महीने के अंदर सड़क को बंद करना पड़ा। उन्होंने बताया कि कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण के समय में विशेषज्ञों ने इस परियोजना की सुरक्षा को लेकर 13 गंभीर आपत्तियां उठायी थीं, जिनमें लोनावाला बांध के पास इसका अलाइनमेंट, टनल सुरक्षा, भूगर्भीय स्थिरता और तकनीकी मुद्दे शामिल थे। सरकार ने इन चिंताओं को दूर करने के बजाय कमीशन बढ़ाने और भ्रष्टाचार के लिए पुल बनाने में जल्दबाजी की, ताकि फोटो खिंचाने और क्रेडिट लेने का मौका मिल सके, जिसके कारण पुल के खंभे गिर गये।
श्री सपकाल ने गड्ढों को लेकर श्री फडणवीस के उस बयान को ‘बेशर्म’ बताया, जिसमें उन्होंने कहा था कि परियोजना अभी ‘टेस्टिंग फेज’ में है। उन्होंने सवाल किया कि क्या 2014 से सत्ता में रही भाजपा सरकार इतने वर्षों से केवल टेस्टिंग ही कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे अयोध्या राम मंदिर में चोरी छिपाने की कोशिश की जा रही है, वैसे ही सरकार यहां भी भ्रष्टाचार को छिपा रही है।उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पहली ही बारिश के बाद ‘इंफ्रा मैन’ फडणवीस ‘डिजास्टर मैन’ साबित हुए हैं और अब वे पहाड़ी गिरने को ‘मानसून ट्रायल’ कह सकते हैं। उन्होंने महायुति को ‘डबल इंजन’ के बजाय जितने ज्यादा इंजन, उतना बड़ा करप्शन वाली सरकार करार दिया।
सुश्री सुले ने भी परियोजना की विफलता पर चिंता जताते हुए कहा कि इस मिसिंग लिंक ब्रिज परियोजना का उद्घाटन बड़ी धूमधाम से किया गया था, लेकिन अब इससे जुड़े वीडियो बेहद चौंकाने वाले हैं। भारी भरकम बजट के बावजूद नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं हैं। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या इस परियोजना की सुरक्षा के लिए कोई ऑडिट किया गया था? क्या इसे प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने के लिए प्लान किया गया था? उन्होंने मांग की कि सरकार मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे, ओल्ड मुंबई-पुणे हाईवे और ट्रेन सेवाओं के बाधित होने की पूरी स्थिति का जायजा ले और तथ्य जनता के सामने रखे।शिवसेना (यूबीटी) के विधायक आदित्य ठाकरे ने भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने एक्स पर लिखा कि भ्रष्टाचार भाजपा और शिंदे गुट का पहला नाम है, चाहे वो सड़कें हों या मंदिर। एक मई, 2026 को उद्घाटन के बाद दो महीने के भीतर ही हजारों करोड़ की लागत वाला यह लिंक लैंडस्लाइड का शिकार हो गया। उन्होंने दावा किया कि जब उन्होंने खुद इस रास्ते का इस्तेमाल किया था, तब पाया कि सड़क का 50 फीट हिस्सा भी समतल नहीं है। यह पूरी तरह ऊबड़-खाबड़ है और ऐसा लगता है जैसे कोई नाव में बैठकर लहरों पर सवारी कर रहा हो।
राकांपा (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने भी श्री फडणवीस की आलोचना करते हुए ट्वीट किया कि पिछले पांच दिनों की बारिश ने इस भ्रष्ट सरकार के खोखले दावों की पोल खोल दी है और इसके सारे काले कारनामे सामने ला दिये हैं। मिसिंग लिंक पर गड्ढे हो गये हैं, भूस्खलन हुआ है और सुरक्षा गायब हो चुकी है। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता इस भ्रष्टाचार को कभी माफ नहीं करेगी।