राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में जांच तेज, तीन आरोपी रिमांड पर; फर्जी रसीद बुक मिलने से जांच को नई दिशा

राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में जांच तेज, तीन आरोपी रिमांड पर; फर्जी रसीद बुक मिलने से जांच को नई दिशा

अयोध्या, 8 जुलाई । अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण की जांच बुधवार को कई अहम घटनाक्रमों के साथ आगे बढ़ी। पुलिस ने 40 घंटे की रिमांड पर लिए गए तीन आरोपियों से गहन पूछताछ की, जबकि जांच के दौरान कथित तौर पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नाम की पुरानी फर्जी रसीद बुक मिलने की जानकारी सामने आई है।इस बीच पुलिस आरोपियों को लेकर विभिन्न स्थानों पर पहुंची और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों का सत्यापन किया। वहीं, सूत्रों के अनुसार विशेष जांच दल (एसआईटी) ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए ट्रस्ट के बड़े आयोजनों से जुड़े वित्तीय अभिलेखों की भी पड़ताल शुरू कर दी है।

पुलिस बुधवार सुबह फैजाबाद जिला कारागार पहुंची और रिमांड पर लिए गए आरोपियों लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडेय को पुलिस लाइन लेकर आई। दिनभर चली पूछताछ में आरोपियों से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर जानकारी ली गई।सूत्रों के मुताबिक पूछताछ के दौरान ट्रस्ट के नाम की पुरानी फर्जी रसीद बुक भी बरामद हुई है। बताया जा रहा है कि यह रसीद असली रसीद की तर्ज पर तैयार की गई थी और उस पर ट्रस्ट का लोगो भी अंकित था। कुछ श्रद्धालुओं से इन्हीं रसीदों के माध्यम से चंदा लिया जाता था। बाद में ऑनलाइन रसीद व्यवस्था लागू होने के बाद इनका उपयोग बंद कर दिया गया था।

जांच के दौरान पुलिस टीम आरोपियों को लेकर 14 कोसी परिक्रमा मार्ग स्थित जानौरा क्षेत्र भी पहुंची, जहां चोरी की रकम की गिनती और बंटवारे से जुड़े तथ्यों का सत्यापन कराया गया। हालांकि मीडिया की मौजूदगी के चलते पुलिस टीम कुछ देर बाद वहां से वापस लौट गई।उधर, जांच के क्रम में मिल्कीपुर क्षेत्र में भी छापेमारी की गई। पुलिस ने आरोपी अनुकल्प मिश्रा के रिश्तेदारों के अलावा इनायतनगर के एक सर्राफा कारोबारी और एक बिल्डिंग मैटेरियल कारोबारी के यहां भी दबिश दी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि आरोपियों द्वारा खरीदी गई संपत्तियों और अन्य सामान का भुगतान नकद किया गया था या ऑनलाइन माध्यम से।

सूत्रों के अनुसार एसआईटी अब 22 जनवरी 2024 को हुए रामलला प्राण-प्रतिष्ठा समारोह तथा 25 नवंबर 2025 को आयोजित ध्वजारोहण कार्यक्रम से जुड़े खर्च के रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है। जांच टीम बिल, वाउचर और भुगतान संबंधी दस्तावेजों का मिलान कर वित्तीय लेन-देन की पड़ताल में जुटी है।

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