ईवी क्रय सब्सिडी योजना से यूपी में इलेक्ट्रिक वाहनों को मिली रफ्तार, आवेदन में लखनऊ सबसे आगे

ईवी क्रय सब्सिडी योजना से यूपी में इलेक्ट्रिक वाहनों को मिली रफ्तार, आवेदन में लखनऊ सबसे आगे

लखनऊ, 8 जुलाई। उत्तर प्रदेश सरकार की इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) विनिर्माण एवं मोबिलिटी प्रोत्साहन नीति-2022 का असर प्रदेश भर में तेजी से दिखाई दे रहा है।परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार ईवी क्रय सब्सिडी योजना के तहत सभी जिलों में इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति लोगों का रुझान लगातार बढ़ रहा है। आवेदन के मामले में राजधानी लखनऊ प्रदेश में पहले स्थान पर है, जबकि नोएडा, आगरा, गाजियाबाद और वाराणसी भी शीर्ष जिलों में शामिल हैं।

परिवहन विभाग के मुताबिक लखनऊ ट्रांसपोर्ट नगर आरटीओ में सबसे अधिक 12,520 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इसके बाद आगरा में 10,752, गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) में 6,088, गाजियाबाद में 5,556, वाराणसी में 4,059, कानपुर नगर में 3,895, लखनऊ महानगर एआरटीओ में 3,839, सहारनपुर में 3,768, गोरखपुर में 3,204 और प्रयागराज में 3,110 आवेदन प्राप्त हुए हैं।प्रदेश के छोटे जिलों में भी इलेक्ट्रिक वाहनों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ी है। योजना के तहत मऊ में 817, गाजीपुर में 750, कुशीनगर में 547, उन्नाव में 387, महाराजगंज में 170, संत कबीर नगर में 101 और सिद्धार्थनगर में 74 आवेदन प्राप्त हुए हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे जिलों में भी इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर भरोसा बढ़ रहा है।

प्रदेश सरकार की इस योजना से वाहन मालिकों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिल रहा है। दोपहिया इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर 5 हजार रुपये की राज्य सब्सिडी दी जा रही है। इसके अलावा रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में 100 प्रतिशत छूट प्रदान की जा रही है। स्मार्ट कार्ड आरसी और हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) शुल्क में भी राहत मिलने से एक दोपहिया ईवी खरीदने पर कुल करीब 18 हजार रुपये तक की बचत संभव हो रही है।परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने कहा कि योजना के तहत गैर-सरकारी ई-बसों पर 20 लाख रुपये तक, चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहनों पर एक लाख रुपये तक और दोपहिया वाहनों पर 5 हजार रुपये तक की सब्सिडी दी जा रही है। उन्होंने लोगों से योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा कि इससे शून्य उत्सर्जन (जीरो एमिशन) के लक्ष्य को प्राप्त करने और पर्यावरण संरक्षण में मदद मिलेगी।

परिवहन विभाग के अनुसार इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने वाले उपभोक्ताओं को खरीद के समय ही नहीं, बल्कि संचालन के दौरान भी आर्थिक लाभ मिल रहा है। पेट्रोल और डीजल वाहनों की तुलना में ईवी की प्रति किलोमीटर परिचालन लागत काफी कम है, जिससे नियमित यात्रा करने वाले लोगों को प्रतिवर्ष हजारों रुपये की बचत हो रही है।सरकार का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के बढ़ते उपयोग से पेट्रोल और डीजल की खपत में कमी आएगी, जिससे वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन घटेगा तथा प्रदेश स्वच्छ और हरित परिवहन व्यवस्था की ओर तेजी से बढ़ सकेगा।

परिवहन विभाग के मुताबिक यदि वर्ष 2030 तक देश में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी 20 प्रतिशत तक पहुंच जाती है, तो कच्चे तेल के आयात बिल में लगभग एक लाख करोड़ रुपये तक की बचत संभव है। इस लक्ष्य की प्राप्ति में उत्तर प्रदेश की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है और इसी उद्देश्य से राज्य सरकार अधिक से अधिक लोगों को ईवी क्रय सब्सिडी योजना का लाभ उपलब्ध करा रही है।

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