ज्ञान को समाज और राष्ट्र सेवा में समर्पित करें छात्र : आनंदीबेन

ज्ञान को समाज और राष्ट्र सेवा में समर्पित करें छात्र : आनंदीबेन

कानपुर, 09 जुलाई । उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने गुरुवार को छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के 41वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि ज्ञान को समाज और राष्ट्र सेवा के लिए समर्पित करना है।उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान, संस्कार और कौशल का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करें तथा जीवन में चाहे जितनी ऊंचाइयों पर पहुंचें, अपने पारिवारिक और सामाजिक मूल्यों को कभी न भूलें।

वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई प्रेक्षागृह में आयोजित दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की संख्या में 131.7 प्रतिशत की वृद्धि, राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग (एनआईआरएफ), क्यूएस एशिया रैंकिंग तथा वैश्विक सस्टेनेबिलिटी इंडेक्स में प्राप्त पहचान संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता का प्रमाण है।राज्यपाल ने विश्वविद्यालय में प्रशासन, अनुसंधान और शिक्षण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के समावेश तथा डिजिटल गवर्नेंस की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि तकनीकी नवाचार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाया जा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से डिग्री और अंकपत्रों के डिजिलॉकर पर उपलब्ध कराए जाने की सुविधा का शत-प्रतिशत लाभ उठाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उसमें संगीत, योग, खेल, नैतिक मूल्यों और मानसिक स्वास्थ्य जैसे आयामों को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से पढ़ाई के साथ किसी न किसी कौशल और कला को सीखने पर बल देते हुए कहा कि यही आत्मनिर्भरता की वास्तविक नींव है।राज्यपाल ने विशेष रूप से छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि विवाह अथवा पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अपने करियर और शिक्षा को सीमित नहीं करना चाहिए, बल्कि समाज और राष्ट्रहित में अपनी प्रतिभा का पूरा उपयोग करना चाहिए।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने वार्षिक प्रगति आख्या प्रस्तुत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय पारंपरिक शिक्षा से आगे बढ़कर वैश्विक मानकों के अनुरूप स्वयं को विकसित कर रहा है तथा शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक दायित्वों के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य कर रहा है।दीक्षांत समारोह में कुल 1,07,713 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें 57,348 छात्राएं और 50,365 छात्र शामिल हैं। समारोह में 51 मेधावी छात्र-छात्राओं को 96 पदक प्रदान किए गए, जिनमें 42 छात्राएं और नौ छात्र शामिल रहे। इस प्रकार पदक विजेताओं में छात्राओं की हिस्सेदारी 82.35 प्रतिशत रही। इसके अलावा 92 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई, जिनमें 50 छात्राएं और 42 छात्र शामिल हैं।

समारोह में परंपरागत कच्छ चर्म शिल्प के विशिष्ट शिल्पाचार्य एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षक श्री अंचल पी. बिजलानी को डॉक्टर ऑफ लेटर्स (डी.लिट्.) की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।इस अवसर पर अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के अध्यक्ष एवं दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. योगेश कुमार सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, उच्च शिक्षा राज्य मंत्री रजनी तिवारी, प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी, कुलसचिव राकेश कुमार मिश्रा तथा विश्वविद्यालय के शिक्षक, अधिकारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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