
जेनेवा, 09 जुलाई । विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक दुनिया भर में हर दिन कैंसर की वजह से 26,000 से अधिक लोग अपनी जान गंवा रहे हैं और साल 2050 तक कैंसर के सालाना मामलों की संख्या बढ़कर करीब 3.5 करोड़ पहुंच सकती है।डब्ल्यूएचओ और इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (आईआरएसी) द्वारा संयुक्त रूप से तैयार की गयी ‘ग्लोबल स्टेटस रिपोर्ट ऑन कैंसर 2026’ के अनुसार, वर्तमान में हर साल दुनिया भर में कैंसर के लगभग 2.06 करोड़ नए मामले सामने आते हैं और करीब एक करोड़ मौतें होती हैं। हृदय रोगों के बाद कैंसर दुनिया में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण बना हुआ है।रिपोर्ट में कैंसर के इलाज और देखभाल को लेकर दुनिया के अमीर और गरीब देशों के बीच की बड़ी असमानता पर गहरी चिंता जतायी गयी है। आंकड़ों के मुताबिक, उच्च आय वाले देशों में जहां स्तन कैंसर से पीड़ित 87 फीसदी महिलाएं इलाज के बाद पांच साल से अधिक समय तक जीवित रह पाती हैं, वहीं कम आय वाले देशों में यह आंकड़ा महज 42 प्रतिशत है। इसके अलावा, दुनिया के हर तीन में से केवल एक देश ने ही अपने सार्वभौमिक स्वास्थ्य पैकेज में कैंसर के इलाज को शामिल किया है।डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस ने कहा, “कैंसर एक बेहद दर्दनाक बीमारी है जो हममें से लगभग हर किसी को छूती है। कोई व्यक्ति कैंसर से बच पाएगा या नहीं, यह इस बात पर बिल्कुल निर्भर नहीं होना चाहिए कि उसने कहाँ जन्म लिया है या वह कितना कमाता है। रिपोर्ट में दिख रही यह असमानता कोई मजबूरी नहीं है बल्कि नीतियों के गलत फैसलों का नतीजा है, जिसे मजबूत इच्छाशक्ति से बदला जा सकता है।”रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में फेफड़ों (लंग) का कैंसर मौत का बड़ा कारण बना हुआ है। पुरुषों में फेफड़े, प्रोस्टेट और कोलोरेक्टल कैंसर सबसे ज्यादा पाए जाते हैं, जबकि महिलाओं में स्तन, फेफड़े और कोलोरेक्टल कैंसर के मामले सबसे अधिक हैं। राहत की बात यह है कि साल 2010 के बाद से तंबाकू के इस्तेमाल में 27 प्रतिशत की कमी आयी है, जिससे कुछ इलाकों में फेफड़ों के कैंसर के मामलों में गिरावट देखी गई है।डब्ल्यूएचओ ने इस संकट से निपटने के लिए सरकारों से सात मुख्य सिफारिशें की हैं, जिनमें कैंसर के इलाज को स्वास्थ्य बीमा प्रणालियों में जोड़ना, प्रभावित परिवारों को सामाजिक सुरक्षा देना और इलाज की जरूरी दवाओं को हर गरीब-अमीर तक आसानी से पहुंचाना शामिल है।