
बैँकॉक,13 जुलाई। थाईलैंड की राजधानी बैँकॉक में बीती रात एक बार में आग लगने से कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई है और आठ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। देश के प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने यह जानकारी दी।
बीबीसी के एक रिपोर्ट के अनुसार आधी रात के ठीक बाद अग्निशमन विभाग को मौके पर बुलाया गया। उन्होंने देखा कि लोग आग की लपटों से घिरे हुए बार के मुख्य दरवाज़े से बाहर भाग रहे थे।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि आग ड्रिंक्स और लाइव म्यूज़िक के लिए मशहूर इस जगह पर स्टेज के पास लगी और तेज़ी से फैल गई, जिससे बिजली चली गई और कमरा धुएं से भर गया। ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए वीडियो में बार से आग की लपटें निकलती दिख रही हैं और लोग बाहर भाग रहे हैं; कुछ लोग चीख रहे हैं तो कुछ गिर रहे हैं।
प्रधानमंत्री अनुतिन चर्नविराकुल ने कहा कि आग लगने की आधिकारिक वजह का अभी पता लगाया जा रहा है।
एक वीडियो से ली गई तस्वीर में बार से आग का गोला निकलता दिख रहा है। इस फुटेज में मुख्य दरवाज़े से आग की लपटें निकलती दिख रही हैं और लोग जान बचाने के लिए आग के बीच से भाग रहे हैं। दमकलकर्मी आधी रात के ठीक बाद मौके पर पहुँचे।
बताया जाता है कि स्थानीय समय के अनुसार रात 11:30 बजे के आसपास वहाँ से गुज़र रहे एक चालक ने बार में आग लगी देखी थी। उसने स्थानीय समाचार आउटलेट ‘डेली न्यूज़’ को बताया कि वह अपनी कार से बाहर निकला और दो लोगों को बचाने के लिए खिड़कियाँ तोड़ीं।
प्रधानमंत्री अनुतिन ने पत्रकारों को बताया कि उन्होंने एक संगीतकार से बात की, जो आग लगने के समय अपनी प्रस्तुति दे रहा था। उसने बताया कि क्या हुआ था।
“उसने बताया कि कट-आउट स्विच में आग लगी थी और उसके बाद सब कुछ बहुत तेज़ी से हुआ। धमाके हुए और हर कोई धुएँ और आग की लपटों से बचने के लिए भागने की कोशिश करने लगा। उनमें से कई लोग बाहर नहीं निकल पाए क्योंकि वे बिल्डिंग के पिछले हिस्से में चले गए थे और धुएँ और आग से बचने के लिए टॉयलेट में छिपने की कोशिश कर रहे थे, और वहीं हमें ज़्यादातर शव मिले।”
खबरों के मुताबिक, दमकल कर्मियों लगभग आधे घंटे में आग पर काबू पाने में कामयाब रहे, लेकिन इसके बावजूद – नौ पुरुष और 18 महिलाओं की मौत हो गई, और 60 से ज़्यादा लोगों का अस्पताल में इलाज चल रहा है, जिनमें से आठ गंभीर रूप से घायल हैं।
बैंकॉक के आपातकालीन विभाग के निदेशक सुरियाचाई रविवान ने कहा कि शुरुआती जांच से पता चलता है कि ज़्यादातर पीड़ितों की मौत धुआँ अंदर जाने (दम घुटने) से हुई। हालाँकि, उन्होंने कहा कि इसकी पुष्टि के लिए और जांच की ज़रूरत है।