नेतन्याहू के नेतृत्व पर जनमत-संग्रह माने जा रहे चुनाव 27 अक्टूबर को होंगे

नेतन्याहू के नेतृत्व पर जनमत-संग्रह माने जा रहे चुनाव 27 अक्टूबर को होंगे

यरूशलम, 13 जुलाई । इजरायल में आम चुनाव 27 अक्टूबर को होंगे। देश की संसद (कनेसेट) ने इसकी घोषणा करते हुए कहा कि कानून के तहत निर्धारित अंतिम तिथि पर चुनाव कराये जाएंगे। इन चुनावों को वर्ष 2023 में गाजा युद्ध शुरू होने के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के नेतृत्व पर जनमत-संग्रह के रूप में देखा जा रहा है।

इज़राइल की संसद (कनेसेट) का वर्तमान कार्यकाल 17 जुलाई को समाप्त होने वाला है, जिससे सत्तारूढ़ गठबंधन को कई दशकों में पहली बार अपना पूर्ण चार वर्षीय कार्यकाल पूरा करने का अवसर मिलेगा।

संसद ने कहा, “वर्तमान कनेसेट अपना पूरा कार्यकाल पूरा कर रही है और अगला आम चुनाव कानून के अनुसार 27 अक्टूबर को पहले से निर्धारित है। चूंकि संसद का कार्यकाल समय से पहले समाप्त करने का कोई इरादा नहीं है, इसलिए कनेसेट भंग करने के लिए अलग कानून लाने की आवश्यकता नहीं है।”

इजरायल के 76 वर्षीय प्रधानमंत्री नेतन्याहू सबसे लंबे समय तक इस पद पर बने रहने वाले नेता हैं। उन्होंने एक बार फिर चुनाव लड़ने की घोषणा की है। देश के इतिहास की सबसे दक्षिणपंथी सरकारों में शामिल नेतन्याहू सरकार चुनाव से पहले अपनी स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से कई विधेयकों को पारित कराने में जुटी हुई है।

पिछले महीने श्री नेतन्याहू ने कहा था कि उनका लक्ष्य “ऐसी व्यापक राष्ट्रीय सरकार बनाना है, जो न तो दक्षिणपंथी हो और न वामपंथी तथा जिसे अरब दलों के समर्थन पर निर्भर न रहना पड़े।”

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नेतन्याहू वैचारिक राजनीति से हटकर राष्ट्रीय एकता के मुद्दे पर चुनावी अभियान केंद्रित करने का प्रयास कर रहे हैं, हालांकि हालिया जनमत सर्वेक्षणों में अधिकांश इजरायली नागरिक उनको सत्ता से हटाने के पक्ष में दिखाई दिये हैं। पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइज़ेनकोट उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभर रहे हैं।

इजरायल में फरवरी के अंत में ईरान के साथ संघर्ष विराम को लेकर भी सरकार की आलोचना हुई थी। कई लोगों का मानना था कि तेहरान और वाशिंगटन के बीच हुआ समझौता इज़रायल के हित में नहीं था। इसके अलावा सात अक्टूबर 2023 को हमास के दक्षिणी इज़रायल पर हमलों से पहले सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक को लेकर भी नेतन्याहू सरकार के खिलाफ असंतोष अब भी बना हुआ है।

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