अमेरिका बनेगा होर्मुज़ जलडमरूमध्य का ‘संरक्षक’, ट्रंप ने इसके बदले अंतरराष्ट्रीय भुगतान की मांग की

अमेरिका बनेगा होर्मुज़ जलडमरूमध्य का ‘संरक्षक’, ट्रंप ने इसके बदले अंतरराष्ट्रीय भुगतान की मांग की

वॉशिंगटन, 13 जुलाई । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को कहा कि अमेरिका होर्मुज़ जलडमरूमध्य का “संरक्षक” की भूमिका निभाएगा क्योंकि सप्ताहांत में हुए सैन्य हमलों की एक श्रृंखला के बाद अमेरिका और ईरान इस रणनीतिक जलमार्ग पर नियंत्रण को लेकर अपना विवाद जारी रखे हुए हैं।श्री ट्रंप ने फॉक्स न्यूज़ के शो “फॉक्स एंड फ्रेंड्स” में फ़ोन पर हुए बातचीत में कहा, “हम जलडमरूमध्य पर कब्ज़ा बनाए रखेंगे और शायद उसे हम ही चलायेंगे। हम इस जलडमरूमध्य का संरक्षक बनेंगे। हो सकता है कि हम इसके रक्षक देवदूत बन जाएं और इसके लिए हमें मुआवजा मिलना चाहिए।” उन्होंने तर्क दिया कि अमीर सहयोगी देशों को इस प्रयास में आर्थिक योगदान देना चाहिए।

श्री ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने दशकों तक बिना किसी मुआवज़े के होर्मुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा की। उन्होंने कहा, “हमने 50 वर्षों तक इस जलडमरूमध्य की रक्षा की और इसके लिए हमें कभी कोई भुगतान नहीं मिला। हमने इसकी रक्षा बिना किसी लाभ के की।”ये टिप्पणियाँ उस समय आयी है जब अमेरिकी केंद्रीय कमान ने घोषणा की कि अमेरिकी बलों ने ईरान के खिलाफ हमलों की एक और श्रृंखला पूरी की है। इन हमलों का लक्ष्य उन स्थानों को बनाना था जिनसे ईरान की होर्मुज़ जलडमरूमध्य के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय समुद्री नौवहन को खतरे में डालने की क्षमता कम की जा सके।

श्री ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमताएं बहुत कमजोर हो गयी हैं। उन्होंने कहा कि देश की नौसेना, वायु सेना और मिसाइल प्रणालियां बड़े पैमाने पर नष्ट कर दी गयी हैं। तेहरान के साथ युद्धविराम वार्ता की स्थिति पर चर्चा करते हुए उन्होंने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का बचाव करना भी जारी रखा।श्री ट्रंप के अनुसार, ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका के साथ वार्ता के दौरान 11 घंटे तक बैठक की और शुरुआत में एक समझौते पर पहुंच गए थे लेकिन बाद में उसमें बदलाव की मांग की। उन्होंने कहा, “कल सब कुछ तय हो गया था। ईरानी वार्ताकार बाद में संशोधनों की मांगों के साथ लौटे। हम कोई बदलाव नहीं करने जा रहे हैं।”

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा परिवहन समुद्री मार्गों में से एक है और अब अमेरिका और ईरान के बीच प्रत्यक्ष संघर्ष का केंद्र बन गया है, जहां दोनों पक्ष इस जलमार्ग पर प्रभाव एवं नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं।

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