‘मेरे पास दो ही रास्ते थे… या तो टूट जाता, या उसे कहानी बना देता’: मुनव्वर फारुकी

‘मेरे पास दो ही रास्ते थे… या तो टूट जाता, या उसे कहानी बना देता’: मुनव्वर फारुकी

मुंबई, 14 जुलाई । स्टैंड-अप कॉमेडियन मुनव्वर फारुकी ने कहा है कि उनकी नई स्टैंड-अप स्पेशल ‘धंधो’ उनके जीवन के सबसे कठिन दौर से उपजी कहानी है, जिसमें उन्होंने अपने दर्द और संघर्ष को हास्य के माध्यम से अभिव्यक्त किया है।रोजमर्रा की जिंदगी में हास्य खोजने के लिए पहचाने जाने वाले मुनव्वर इस बार दर्शकों को एक भावनात्मक सफर पर ले जाते हैं। ‘धंधो’ में उन्होंने वर्ष 2021 में जेल में बिताए 37 दिनों और उसके बाद के मानसिक एवं भावनात्मक संघर्ष को खुलकर साझा किया है।मुनव्वर ने कहा, “वे 37 दिन मेरी कॉमेडियन वाली यात्रा खत्म कर सकते थे, लेकिन वही मेरी अब तक की सबसे निजी स्टैंड-अप स्पेशल लिखने की वजह बन गए। मैंने किसी और पर नहीं, बल्कि खुद पर ही चुटकुले बनाए, क्योंकि मेरे लिए हास्य ही जिंदा रहने का तरीका बन गया था। जिस दौर ने मुझे सबसे बड़ा नुकसान दिया, उसी ने मेरी सबसे बड़ी वापसी भी कराई। कई बार जिंदगी हालात बदलने से नहीं, बल्कि अपनी कहानी को अपनाने से बदलती है।”

उन्होंने बताया कि ‘धंधो’ केवल एक स्टैंड-अप शो नहीं, बल्कि उनके जीवन के उस अध्याय की कहानी है जिसने उन्हें व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों स्तरों पर बदल दिया। गुस्से या कड़वाहट के बजाय उन्होंने अपने अनुभवों को ईमानदारी के साथ पेश किया है, जिसमें डर, अनिश्चितता, अकेलापन और संघर्ष के बीच भी हास्य तलाशने की कोशिश दिखाई देती है।रिलीज के बाद ‘धंधो’ को दर्शकों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है। दर्शकों ने इसकी कॉमेडी के साथ-साथ इसकी सच्चाई और भावनात्मक प्रस्तुति की भी सराहना की है। कई लोगों ने मुनव्वर की इस बात के लिए प्रशंसा की कि उन्होंने अपने जीवन के सबसे कठिन दौर को बेबाकी से साझा करते हुए उसे उम्मीद और आत्मविश्वास की कहानी में बदल दिया।

‘धंधो’ के जरिए मुनव्वर फारुकी यह संदेश देने का प्रयास करते हैं कि जीवन के सबसे कठिन अनुभव भी नई शुरुआत और मजबूत वापसी की नींव बन सकते हैं।

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