ईरान ने इराक के माध्यम से दिए गये अमेरिकी युद्धविराम प्रस्ताव को किया खारिज

ईरान ने इराक के माध्यम से दिए गये अमेरिकी युद्धविराम प्रस्ताव को किया खारिज

तेहरान/वॉशिंगटन, 24 जुलाई। ईरान ने इराक के प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी के ज़रिए भेजे गए अमेरिका के युद्धविराम प्रस्ताव को ठुकरा दिया है। ईरान का कहना है कि वह ऐसा कोई अस्थायी समझौता स्वीकार नहीं करेगा जिसमें रणनीतिक रूप से अहम ‘ होर्मुज़ जलडमरुमध्य’ की स्थिति का समाधान न हो।’द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के अनुसार ईरान और इराक के अधिकारियों का हवाला के अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। ईरान की ओर से यह इनकार अमेरिका और ईरान के बीच लगभग दो हफ़्तों से बढ़ती तनातनी के बाद सामने आया है। इस दौरान दोनों पक्षों ने एक-दूसरे पर सैन्य हमले किए हैं, जबकि संघर्ष को रोकने की कूटनीतिक कोशिशें नाकाम रही हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार को इराकी प्रधानमंत्री की यात्रा के दौरान ईरान के सामने युद्धविराम का प्रस्ताव रखा गया था। हालांकि प्रस्ताव की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गयी है, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने कहा कि ईरान ऐसी कोई अस्थायी व्यवस्था स्वीकार करने को तैयार नहीं है जिसमें ‘होर्मुज़ जलडमरुमध्य’ पर नियंत्रण का मुद्दा हल न हो, क्योंकि यह दुनिया भर में ऊर्जा की आपूर्ति के लिए एक अहम समुद्री मार्ग है। व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट पर कोई टिप्पणी नहीं की है।श्री अल-ज़ैदी ने इस महीने की शुरुआत में व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात के बाद ईरान की यात्रा की थी, जिससे यह अटकलें लगाई जा रही थीं कि बगदाद दोनों दुश्मन देशों के बीच मध्यस्थता की कोशिश कर रहा है। इराकी नेता के आने से पहले, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने माना था कि श्री अल-ज़ैदी अमेरिका से संदेश ला सकते हैं, लेकिन उन्होंने कहा कि ईरान अमेरिका के साथ और मध्यस्थता नहीं चाहता है।

श्री अरागची ने ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी से कहा, “मुख्य बाधा अमेरिका का तर्कहीन, अत्यधिक और वर्चस्ववादी रवैया है।” उनके बयान गुरुवार को श्री ट्रंप की टिप्पणियों से बिल्कुल अलग थे, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति ने तत्काल युद्धविराम की संभावना को खारिज कर दिया और संकेत दिया कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रहेंगे। श्री ट्रंप ने कहा, “वे कुछ करना चाहते हैं, लेकिन मेरा कहना है कि वे अभी तैयार नहीं हैं। उन्हें अभी और बहुत कुछ करने की ज़रूरत है।” उन्होंने कहा कि ईरान के नेताओं के कुछ बुरे इरादे हैं। ‘होर्मुज़ जलडमरुमध्य’ में अमेरिका द्वारा नौसैनिक नाकेबंदी फिर से लागू करने के बावजूद संघर्ष और तेज़ हो गया है। ईरान ने इस अहम समुद्री रास्ते में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले जारी रखे हैं और मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर हमले किए हैं, जबकि अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों और बुनियादी ढांचे पर लगातार हवाई हमले किए हैं।न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के दो अधिकारियों ने कहा कि अगर अमेरिका, ईरान और ज़रूरी अवसंरचना पर हमला करने की श्री ट्रंप की धमकियों पर अमल करता है, तो देश की सेनाएँ एक बड़े संघर्ष की संभावना के लिए तैयारी कर रही हैं। उन्होंने कहा कि ईरान इजरायल को निशाना बनाकर और यमन के हूती आंदोलन से बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य (एक और अहम समुद्री रास्ता) को बंद करने के लिए कहकर संघर्ष को बढ़ा सकता है। इस बीच, श्री अल-ज़ैदी की यात्रा के दौरान ईरान और इराक ने आपसी संबंधों को मज़बूत करने की कोशिश की। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन और इराकी प्रधानमंत्री की मौजूदगी में, दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने आर्थिक और प्रशासनिक सहयोग बढ़ाने के मकसद से चार समझौतों और सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किये। इन समझौतों में सड़क मार्ग से माल ढुलाई, खोस्रावी-खानाकिन-बगदाद रेलवे का निर्माण, तेहरान और बगदाद के बीच सिस्टर-सिटी पार्टनरशिप की स्थापना, और लोक प्रशासन, प्रशिक्षण तथा मानव संसाधन प्रबंधन में सहयोग शामिल है। इन दस्तावेज़ों पर तेहरान के सादाबाद सांस्कृतिक-ऐतिहासिक परिसर में हस्ताक्षर किए गए, जो क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के बावजूद दोनों पड़ोसी देशों के सहयोग को गहरा करने के प्रयासों को रेखांकित करते हैं

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