
कानपुर, 26 जुलाई। विश्व हिंदू परिषद (विहिप) कानपुर प्रांत की दो दिवसीय प्रांत योजना बैठक रविवार को जय नारायण विद्या मंदिर इंटर कॉलेज, विकास नगर में संपन्न हो गई। बैठक में केंद्रीय स्तर पर पारित प्रस्तावों को अंगीकार करते हुए आगामी कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया। संगठन ने एक करोड़ हितचिंतक बनाने, परिवार प्रबोधन अभियान चलाने तथा वेद विद्यालयों के माध्यम से प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ावा देने का संकल्प लिया।
बैठक का आयोजन 25 और 26 जुलाई को किया गया। उद्घाटन सत्र में क्षेत्र संगठन मंत्री गजेंद्र जी ने कार्यकर्ताओं का मार्गदर्शन किया। बैठक में प्रांत अध्यक्ष राजीव महाना, प्रांत कार्याध्यक्ष डॉ. उमेश पालीवाल, प्रांत उपाध्यक्ष विनोद अग्रवाल, प्रांत मंत्री राजू पोरवाल, प्रांत सह मंत्री अभिनव दीक्षित एवं अवधेश भदौरिया, मातृशक्ति संयोजिका डॉ. सीमा जादौन सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। कानपुर प्रांत के सभी 21 जिलों से विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, दुर्गावाहिनी और मातृशक्ति के क्षेत्र, प्रांत, विभाग एवं जिला स्तर के कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
प्रांत मंत्री राजू पोरवाल ने बताया कि केंद्रीय बैठक में पारित सभी प्रस्तावों को प्रांत कार्ययोजना में शामिल करते हुए आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा तय की गई।
बैठक में पारित प्रस्तावों में परिवार व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने पर विशेष बल दिया गया। संगठन ने कहा कि भारतीय परिवार व्यवस्था समाज की मूल शक्ति है और इसके संरक्षण के लिए व्यापक जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। इस संबंध में परिवार प्रबोधन कार्यक्रमों का आयोजन करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में ओडिशा के कंधमाल में स्वामी लक्ष्मणानंद सरस्वती की हत्या की जांच के लिए गठित आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं किए जाने पर चिंता व्यक्त की गई। संगठन ने मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराने तथा ओडिशा में मतांतरण पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग की।
संत शिरोमणि गुरु रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर सामाजिक समरसता, समानता और आध्यात्मिक चेतना के संदेश के प्रसार के लिए मोहल्ला स्तर तक धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
बैठक में श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के प्रमुख नेता रहे अशोक सिंघल की जन्मशती वर्ष के अवसर पर वर्षभर विविध कार्यक्रम आयोजित करने का भी निर्णय लिया गया। इस दौरान संगठन ने एक करोड़ हितचिंतक बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। साथ ही गौ-आधारित कृषि, गौ-रक्षा, गौ-संवर्धन तथा वेद विद्यालयों के माध्यम से प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा के संवर्धन पर विशेष जोर देने का निर्णय लिया गया।
बैठक का समापन सनातन मूल्यों की रक्षा, सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने तथा राष्ट्रहित के कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाने के संकल्प के साथ हुआ