गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर उत्तर प्रदेश में आस्था का सैलाब

गुरु पूर्णिमा के पावन पर्व पर उत्तर प्रदेश में आस्था का सैलाब

लखनऊ, 29 जुलाई । गुरु-शिष्य परंपरा का साक्षी गुरु पूर्णिमा पर्व बुधवार को समूचे उत्तर प्रदेश में श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया जा रहा है। तीर्थराज प्रयागराज, अध्यात्मिक नगरी वाराणसी, भगवान राम की तपोभूमि चित्रकूट समेत प्रदेश के विभिन्न अंचलों में गुरु के प्रति अगाध श्रद्धा,प्रेम और आस्था का प्राकट्य उनके शिष्य विनीत भाव से कर रहे हैं। इस अवसर पर गुरुओं के आश्रम और अन्य देव स्थलों पर आस्था का सैलाब हिलोरें मार रहा है। कई आश्रमों में शिष्यगणों को गुरु सेवा और लंगर प्रसाद के पुनीत कार्य में लिप्त देखा जा सकता है।आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है। इस दिन महर्षि वेद व्यास की जन्म तिथि के चलते इसे व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। श्रद्धालु अपने गुरुओं का पूजन करते हैं उनके पांव पखारते हैं और उनसे आशीर्वाद भी लेते हैं।

प्रयागराज से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार यहां गुरु पूर्णिमा का पर्व बड़े ही आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। इस मौके पर गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती की त्रिवेणी पर ब्रह्म मुहूर्त से श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु त्रिवेणी में स्नान के बाद दान पुण्य कर रहे हैं।मां गंगा और यमुना से परिवार में सुख शांति और समृद्धि की कामना कर रहे हैं। गुरु पूर्णिमा पर संगम में आस्था, श्रद्धा और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। जहां हजारों श्रद्धालु पवित्र त्रिवेणी में स्नान कर आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव कर रहे हैं। वहीं श्रद्धालुओं ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया है। गंगा स्नान के बाद श्रद्धालु मंदिरों में दर्शन पूजन और अपने गुरुओं का भी आशीर्वाद ले रहे हैं।इसी तरह काशी में भी संतों के पांव पखारने वाले शिष्यों का तांता लगा हुआ है। गुरुवार से श्रावण मास की शुरुआत होने के कारण यहां बाबा विश्वनाथ धाम और आसपास के क्षेत्रों में कांवड़ियों ने भी अपना डेरा जमा लिया है। इस अवसर पर गंगा घाटों पर सुरक्षा के चाक चौबंद इंतजाम किये गये हैं।

गायत्री पीठ के संस्थापक श्रीराम शर्मा के देश प्रदेश में फैले विभिन्न आश्रमों में आज सुबह से हवन पूजन का कार्यक्रम संपन्न किया जा रहा है। इसके पश्चात गुरु वचनो काे प्रवचन के माध्यम से शिष्यों तक पहुंचाया जायेगा और विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों के जरिये देश और समाज के प्रति कर्तव्यों का बोध कराया जायेगा।चित्रकूट में संत रामभद्राचार्य के आश्रम में शिष्यों के तांता लगा हुआ है हालांकि स्वामी रामभद्राचार्य के एकांतवास में होने के कारण दर्शन सुलभ नहीं हो सकेंगे। इस तरह अन्य गुरु आश्रम भी शिष्यों की चहल पहल से गुलजार हैं। प्रदेश के अलग अलग स्थानों पर लाखों की संख्या में ऐसे शिष्य भी हैं जो किन्ही कारणवश गुरु सेवा में उपस्थित नहीं हो सकते हैं, उन्होने अपने गुरुजनों के प्रति श्रद्धाभाव से आम,मिष्ठान और नाना प्रकार के फल फूल गुरु की तस्वीर के आगे अर्पित कर उनसे आशीर्वाद मांगा है।

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