
नयी दिल्ली, 03 अगस्त । दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता और भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण सिंह और डब्ल्यूएफआई के पूर्व सहायक सचिव विनोद तोमर को महिला पहलवानों के उत्पीड़न के आरोपों से जुड़े मामले में बरी कर दिया।. राउज़ एवेन्यू अदालत के अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने अंतिम बहस पूरी होने के बाद दो जुलाई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे आज सुनाया गया। मामले की सुनवाई बंद कमरे में हुई थी।
यह मामला ओलंपियन विनेश फोगाट सहित छह महिला पहलवानों के लगाये आरोपों से जुड़ा था, जिन्होंने डब्ल्यूएफआई प्रमुख के रूप में श्री सिंह के कार्यकाल के दौरान यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। कथित घटनाएं 2016 से 2019 के बीच महासंघ के कार्यालय, श्री सिंह के सरकारी आवास और विदेशी दौरों के दौरान होने की बात कही गई थी। श्री सिंह ने लगातार सभी आरोपों से इनकार किया था।अदालत ने सह-आरोपी विनोद तोमर को भी बरी कर दिया, जो एक शिकायतकर्ता के संबंध में आपराधिक धमकी देने से जुड़े आरोपों का सामना कर रहे थे। मई 2024 में आरोप तय करते समय अदालत ने एक शिकायतकर्ता के मामले में श्री सिंह को बरी कर दिया था और तोमर के खिलाफ कई आरोपों को हटा दिया था, जबकि बाकी आरोपों पर मुकदमे की सुनवाई जारी रखने की अनुमति दी थी।
शिकायतकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने पक्ष रखा, जबकि श्री सिंह की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव मोहन पेश हुए। मुकदमा शुरू होने से पहले अदालत ने आगे की जांच और अतिरिक्त दस्तावेज जमा करने की श्री सिंह की याचिका खारिज कर दी थी, जिसमें उन्होंने तर्क दिया था कि आरोपों में उल्लिखित तिथियों में से एक दिन वे भारत में मौजूद नहीं थे।दिल्ली पुलिस ने श्री सिंह के खिलाफ दर्ज शिकायतों की जांच के बाद जून 2023 में आरोप पत्र दाखिल किया था। आरोपों में भारतीय दंड संहिता के यौन उत्पीड़न, महिला की लज्जा भंग करने, पीछा करने और आपराधिक धमकी से संबंधित प्रावधान शामिल थे। तोमर पर उकसाने का अतिरिक्त आरोप भी लगाया गया था।यह आपराधिक मामला 2023 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर भारत के कुछ प्रमुख पहलवानों के किये गये लंबे विरोध-प्रदर्शन के बाद दर्ज हुआ था। ओलंपिक और अंतरराष्ट्रीय पदक विजेताओं विनेश फोगाट, साक्षी मलिक और बजरंग पुनिया के नेतृत्व में हुए इन प्रदर्शनों में श्री सिंह की गिरफ्तारी और उन्हें भारतीय कुश्ती महासंघ से हटाने की मांग की गयी थी।
कानूनी कार्रवाई तब शुरू हुई, जब पहलवानों ने प्राथमिकी दर्ज कराने की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने अप्रैल 2023 में दो एफआईआर दर्ज कीं— एक छह वयस्क महिला पहलवानों की शिकायतों के आधार पर और दूसरी एक नाबालिग पहलवान के आरोपों के बाद पॉक्सो अधिनियम के तहत।
पुलिस ने वयस्क शिकायतकर्ताओं के मामले में आरोप पत्र दाखिल किया, वहीं पॉक्सो वाले मामले में क्लोजर रिपोर्ट जमा कर दी। मई 2025 में अदालत ने क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार कर ली, जिससे नाबालिग शिकायतकर्ता से जुड़ा मामला समाप्त हो गया।वयस्क पहलवानों के मामले में 2023 अदालत में आरोपों पर संज्ञान लेने के बाद औपचारिक रूप से मुकदमा शुरू हुआ। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने मई 2026 में अपने साक्ष्य समाप्त करने से पहले 32 गवाहों से पूछताछ की। अगले महीने आरोपियों के बयान दर्ज किये गये, जिसके बाद दो जुलाई को अंतिम बहस पूरी हुई।इस विवाद के राजनीतिक परिणाम भी देखने को मिले। 2024 के लोकसभा चुनावों से पहले भाजपा ने बृजभूषण शरण सिंह को उत्तर प्रदेश के कैसरगंज संसदीय क्षेत्र से टिकट नहीं दिया। इसके बजाय पार्टी ने उनके बेटे करन भूषण सिंह को उम्मीदवार बनाया, जिन्होंने इस सीट पर जीत हासिल की।