
नयी दिल्ली, 04 अगस्त। भगोड़े अपराधियों के खिलाफ सरकार के सख्त रुख के चलते 2019 से अब तक 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है जिनमें मुंबई हमलों के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा का अमेरिका से प्रत्यर्पण भी शामिल है।गृह मंत्रालय ने मंगलवार को बताया कि भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम लागू होने के बाद देश में भगोड़े अपराधियों के खिलाफ एकीकृत, खुफिया-आधारित और प्रौद्योगिकी-संचालित मॉडल विकसित किया गया है जिससे भगोड़ों के खिलाफ सख्ती बरतते हुए उन्हें वापस लाने का रास्ता साफ हुआ है।वापस लाए गए भगोड़ों में आतंकवादी , गैंगस्टर, आर्थिक अपराधी, नार्कोटिक्स आरोपी, हत्या,बलात्कार और पॉक्सो मामलों के वांछित शामिल हैं। भगोड़ों को वापस लाने का यह अभियान आतंकवाद , खालिस्तान समर्थक उग्रवाद, गैंगस्टर-टेरर कन्वर्जेंस, नार्कोटिक्स, साइबर धोखाधड़ी और फर्जी मुद्रा तक फैला है। तहव्वुर हुसैन राणा का अमेरिका से प्रत्यर्पण भारत के संकल्प और जटिल आतंकी मामलों में धैर्यपूर्ण कानूनी-कूटनीतिक प्रयास का बड़ा उदाहरण है।
जम्मू-कश्मीर से जुड़े मामलों में विदेशों में बैठे भगोड़ों का इस्तेमाल आतंकवाद, नार्को-आतंकवाद और सीमा पार से समर्थित नेटवर्क चलाने में हो रहा था। इसी वर्ष जनवरी में खुफिया ब्यूरो के मल्टी एजेंसी सेंटर के तहत स्टैंडिंग फोकस ग्रुप का गठन भी एक महत्वपूर्ण संस्थागत कदम है।मंत्रालय के अनुसार वर्ष 2014 से पहले प्रत्यर्पण से संबंधित कानून पुराने हो गए थे और केवल 37 देशों के साथ भारत की प्रत्यर्पण संधियां थीं। आर्थिक भगोड़ों को पकड़ने और उनकी संपत्ति जब्त करने के लिए कोई अलग कानून नहीं था। वर्ष 2004 से 2013 के बीच हर वर्ष औसतन केवल चार भगोड़ों का प्रत्यर्पण होता था जबकि 110 अनुरोध लंबित थे। इसके अलावा, अधूरे दस्तावेज़ और धीमी कार्यवाही के कारण प्रत्यर्पण प्रक्रिया बहुत जटिल थी और विदेशी अदालतें भी प्रत्यर्पण की अनुमति नहीं देती थीं। साथ ही कानूनी एवं न्यायिक बाधाओं जैसे, दोहरे अभियोजन से बचाव और दोहरे अपराध के सिद्धांत के कारण भारत के प्रत्यर्पण अनुरोध रद्द हो जाते थे। गृह मंत्रालय और अन्य विभागों में समन्वय तथा एकीकृत रणनीति का अभाव था जिससे भगोड़ों की जानकारी साझा करना, लोकेशन ट्रैकिंग, रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने जैसे कार्य धीमी गति से होते थे।
मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि भगोड़ों को वापस लाने को लेकर पहले की सरकारों में राजनीतिक इच्छाशक्ति का अभाव था जबकि मोदी सरकार ने भगोड़ों के प्रत्यर्पण को ‘राष्ट्रीय प्राथमिकता’ बनाया। सरकार ने भगोड़ों के खिलाफ तीन बातों वैश्विक अभियान, मजबूत समन्वय और स्मार्ट कूटनीति पर विशेष जोर दिया और भगोड़े अपराधियों के मुद्दे को देश की संप्रभुता, आर्थिक स्थिरता, कानून-व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़ा है।सरकार 2019 में राष्ट्रीय जांच एजेन्सी संशोधन अधिनियम और यूएपीए संशोधन अधिनियम लेकर आई और 2020 के बाद भगोड़ों को भारत वापस लाने की प्रक्रिया को ‘मिशन मोड’ में आगे बढ़ाया गया। इससे कार्रवाई केवल संगठनों तक सीमित नहीं रही बल्कि व्यक्तिगत आतंकी, हैंडलर्स, फंडिंग नेटवर्क और विदेशों में बैठे सपोर्ट सिस्टम तक कार्रवाई का दायरा बढ़ा। वर्ष 2024 में सरकार ने तीन नए आपराधिक कानूनों को लागू किया जिनमें भगोड़ों से संबंधित विशेष प्रावधान किए गए। पहली बार, भारतीय न्याय संहिता की धारा 355 और 356 में ‘ अनुपस्थिति में मुकदमे’ का प्रावधान रखा गया जिससे भगाेड़े अपराधियों की अनुपस्थिति में भी मुकदमे से लेकर अभियोजन तक संपूर्ण प्रक्रिया पूर्ण की जा सकेगी।
वर्ष 2022 में भारत ने 90वीं इंटरपोल जनरल असेंबली की मेजबानी की, जिसमें केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वैश्विक पुलिसिंग में “संचार, तालमेल और कोऑपरेशन” का संदेश दिया। भारत और वैश्विक एजेंसियों के बीच समन्वय, संपर्क और संवाद बढ़ाने के लिए श्री शाह द्वारा जनवरी, 2025 में देश की सभी कानून प्रवर्तन एजेंसियों को इंटरपोल से जोड़ने के लिए ‘भारतपोल’ की शुरूआत की गयी। भारतपोल ने सीबीआई, राज्य पुलिस मुख्यालय और जिला पुलिस मुख्यालय को एकीकृत कर एक व्यापक संचार आधारभूत नेटवर्क निर्मित किया। इसके कारण, सीबीआई और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच जानकारी साझा करने के समय में भारी कमी आई है। अब यह जानकारी 10 से 20 दिनों में और कुछ मामलों में मात्र 3 से 10 दिनों में साझा कर दी जाती है ।सरकार ने धन शोधन निरोधक कानून को सख्ती से लागू किया है। इसके सख्ती से लागू होने से वर्ष 2019 से 2026 तक भगौड़ों की कुल 17,874 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गयी। वर्ष 2019 से 2026 तक 18,762 करोड़ रुपये की सफल वापसी की गई, इसमें देश छोड़कर भागे आर्थिक अपराधियों का पैसा भी शामिल है। सीबीआई ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भगोड़ों को पकड़ने के लिए विशेष वैश्विक संचालन केन्द्र स्थापित किये हैं। यह केंद्र इंटरपोल के माध्यम से दुनिया भर की पुलिस से वास्तविक समय में समन्वय करता है। सूचनाओं के त्वरित आदान-प्रदान के लिए हर राज्य और केन्द्रीय जांच एजेंसी में सीबीआई ने इंटरपोल सम्पर्क अधिकारी नियुक्त किए हैं।
इंटरपोल को रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की संख्या भी बढी है। वर्ष 2022 में 40, 2023 में 100, 2024 में 107, 2025 में 112, और 2026 में अब तक 182 रेड कार्नर नोटिस जारी किये गये हैं। भगोड़ों की जियो-लोकेशन ट्रैक करने के लिए ऑपरेशन त्रिशूल चलाया गया। इसके तहत इंटरपोल के सहयोग से छिपे हुए अपराधियों की सैटेलाइट, सर्विलांस, डिजिटल फुटप्रिंट के आधार पर लोकेशन स्थापित की गई। भगोड़ों द्वारा विदेश में नाम या पहचान बदल ली गई थी लेकिन फिर भी तकनीक और प्रोफाइल-मैपिंग के ज़रिये उन्हें खोज निकाला गया। प्रत्यर्पण प्रक्रिया तेज करने के लिए वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से मुकदमों की सुनवाई जैसी तकनीकों का भी उपयोग किया जा रहा है। पिछले तीन वर्षों में 401 भगोड़े अपराधियों के विरुद्ध रेड कार्नर नोटिस जारी हुए।