
लखनऊ, 7 अगस्त। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रामाशीष राय ने अपने पद के साथ-साथ पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से भी इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना त्यागपत्र राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी को भेजा है।डॉ. राय ने अपने त्यागपत्र में प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व सौंपने के लिए श्री चौधरी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने संगठन को मजबूत बनाने के लिए अपनी क्षमता के अनुरूप प्रयास किए। उन्होंने प्रदेश के विभिन्न जनपदों का व्यापक दौरा किया, कार्यकर्ताओं से संवाद स्थापित किया तथा संगठन के विस्तार और सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य किया।
उन्होंने कहा कि वह वर्ष 1974-75 के लोकनायक जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति आंदोलन से प्रेरित होकर राजनीति में आए थे। उस समय भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी, लोकतांत्रिक संस्थाओं के क्षरण तथा शासन-प्रशासन की जवाबदेही जैसे मुद्दे राष्ट्रीय चिंता के विषय थे और व्यवस्था परिवर्तन का जो सपना देखा गया था, वह आज भी अधूरा प्रतीत होता है।त्यागपत्र में डॉ. राय ने कहा कि भारतीय लोकतंत्र धीरे-धीरे धनबल और प्रभावशाली वर्गों के नियंत्रण में सिमटता दिखाई दे रहा है। समाज को जाति, उपजाति और संप्रदाय के आधार पर विभाजित करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।
श्री राय ने कहा है कि किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, जबकि युवा बेरोजगारी और भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं। शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के क्षेत्र में बढ़ती निराशा से जनमानस में असंतोष बढ़ रहा है।उन्होंने कहा कि देश के महापुरुषों ने सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और बंधुत्व की भावना को मजबूत करने के लिए “जाति तोड़ो, समाज जोड़ो” का संदेश दिया था, लेकिन आज सार्वजनिक जीवन में सामाजिक विभाजन और जातीय उन्माद को बढ़ावा देने की प्रवृत्ति लोकतंत्र, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रहित के लिए घातक बनती जा रही है।
डॉ. राय ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने भी राजनीति और चुनावों में बढ़ते धनबल को लोकतंत्र के लिए गंभीर खतरा बताया था।श्री राय ने कहा है कि आज राजनीति में वैचारिक प्रतिबद्धता की जगह आर्थिक शक्ति और परिवारवाद का प्रभाव बढ़ता जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक मूल्यों को लगातार क्षति पहुंच रही है। उन्होंने अपने त्यागपत्र में कहा कि संविधान, लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं पर हो रहे प्रहार से लोकतंत्र खतरे में है। व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ा देश होने की भावना का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन्हीं वैचारिक एवं नैतिक कारणों से वह प्रदेश अध्यक्ष पद तथा पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से अपना त्यागपत्र दे रहे हैं।