ओआईसी ने तुर्की-सऊदी-पाकिस्तान संयुक्त रक्षा समझौते का स्वागत किया

ओआईसी ने तुर्की-सऊदी-पाकिस्तान संयुक्त रक्षा समझौते का स्वागत किया

जेद्दा, 08 अगस्त । इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) ने तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्रीय सुरक्षा और सहयोग मजबूत करने की दिशा में ‘महत्वपूर्ण रणनीतिक कदम’ बताया है।ओआईसी के महासचिव हिसेन ब्राहिम ताहा ने समझौते के प्रति ”मजबूत समर्थन और सराहना” व्यक्त करते हुए कहा कि यह तीनों देशों की क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

ओआईसी की ओर से जारी बयान के अनुसार, श्री ताहा ने कहा कि यह समझौता क्षेत्र और व्यापक मुस्लिम जगत में सुरक्षा एवं स्थिरता को मजबूत करने में ‘मूलभूत स्तंभ’ के रूप में काम करेगा। उन्होंने कहा कि यह उभरती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने तथा ओआईसी के सदस्य देशों के बीच एकजुटता और रचनात्मक साझेदारी मजबूत करने के लिए साझा संकल्प को दर्शाता है।ओआईसी महासचिव ने समझौते के लिए तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के नेतृत्व एवं प्रयासों की भी सराहना की और इसे ”ऐतिहासिक समझौता” बताया। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता क्षेत्र और इसके बाहर शांति, स्थिरता और समृद्धि में योगदान देगा।

यह समझौता तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप अर्दोआन, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने मक्का के अल-सफा पैलेस में आयोजित त्रिपक्षीय शिखर बैठक के दौरान हस्ताक्षरित किया।तुर्की के अधिकारियों के अनुसार, रक्षा केंद्रित यह समझौता किसी विशेष देश के खिलाफ लक्षित नहीं है। इसका उद्देश्य सामूहिक सुरक्षा मजबूत करना, रक्षा सहयोग को गहरा करना तथा अधिक जिम्मेदारी साझा करने और साझा सुरक्षा दृष्टिकोण के माध्यम से क्षेत्रीय एवं वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि को बढ़ावा देना है।

समझौते का उद्देश्य आक्रामकता की स्थिति में तीनों देशों की सामूहिक प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करना है। इसके तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने की स्थिति को तीनों पर हमला माना जाएगा।हालांकि, संयुक्त बयान में प्रत्येक देश द्वारा किये जाने वाले विशिष्ट दायित्वों का विवरण नहीं दिया गया है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि किसी एक सदस्य पर हमले की स्थिति में अन्य दोनों देशों को किस सीमा तक सैन्य कार्रवाई करनी होगी।

तुर्की के उपराष्ट्रपति जेवडेट यिलमाज ने कहा कि यह समझौता किसी विशेष देश को निशाना बनाकर नहीं किया गया है। तुर्की के एक अधिकारी ने इसे पूरी तरह रक्षात्मक बताते हुए कहा कि यह समझौता तीनों देशों के अन्य देशों के साथ मौजूदा रक्षा समझौतों का स्थान नहीं लेगा।यह समझौता ऐसे समय हुआ है जब मध्य पूर्व में सुरक्षा तनाव बढ़ा हुआ है और क्षेत्रीय अस्थिरता को लेकर चिंता बनी हुई है। सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देश सुरक्षा तथा ऊर्जा से जुड़े बढ़ते जोखिमों का सामना कर रहे हैं।

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