
इटावा, 09 अगस्त । उत्तर प्रदेश के इटावा लायन सफारी में शेरों का कुनबा लगातार बढ़ रहा है।देश दुनिया में एशियाई शेरों के सबसे बड़े आशियाने के रूप में लोकप्रिय लॉयन सफारी में कुल मिलाकर 23 शेर शेरनी और शावक है जिनकी बेहतर तरीके से देखभाल की जा रही है । सफारी में अब जो शेर है उनमें से ज्यादातर का जन्म लायन सफारी में हीं हुआ है । लायन सफारी में अब शेरों की तीसरी पीढ़ी भी आ गई है ।
इटावा सफारी पार्क में स्थित लायन सफारी शेरों का सुरक्षित और सेहतमंद रहने का आशियाना बन गई है। खास बात यह है कि यहां लगातार शेरों का कुनबा बढ़ता जा रहा है। शावक जन्म ले रहे है और उनका बेहतर तरीके से पालन पोषण भी किया जा रहा है । इस समय यहां 23 शेर हैं ।शेरों का संरक्षण और शेरों के बारे में लोगों को जागरूक करने, भ्रांतियां मिटाने के मकसद से विश्व शेर दिवस 10 अगस्त को मनाया जाता है। इस बीच इटावा सफारी पार्क में बनी हुई लायन सफारी शेरों का कुनबा बढ़ाने में मददगार हो रही है और यह शेरों का सुरक्षित आशियाना बन गया है। यहां उन्हें प्राकृतिक माहौल मिलता है और जंगल के राजा सफारी में इस तरह रहते हैं जैसे जंगल में रहते हैं। पर्यटक बंद बसों में आते हैं और राजा खुले में विचरण करते हुए उन्हें दिखाई देते हैं।
इटावा सफारी पार्क में सबसे पहले लायन सफारी बनाई गई। सबसे पहले यहां हैदराबाद से शेरों विष्णु और लक्ष्मी का जोड़ा लाया गया और उसके बाद गुजरात से शेर शेरनी लाए गए। लायन सफारी में ब्रीडिंग की सुविधा के कारण इसी सफारी में शेरों का कुनबा लगातार बढ़ता चला गया। अभी भी शेरों का कुनबा बढ रहा है और शेर प्राकृतिक माहौल में मस्त हैं।2014 से लेकर 2016 तक केनाइन डिस्टेंपर की बीमारी शेरों में फैली थी । इसके कारण सफारी के भी कई शेरों की जान चली गई लेकिन इटावा सफारी ने केनाइन डिस्टेंपर जैसी जानलेवा बीमारी से बचाव का तरीका खोज लिया। इसके लिए वैक्सीन बनाई गई और यह वैक्सीन पूरे देश में शेरों को लगाई गई, जिसके चलते अब शेर केनाइन डिस्टेंपर से सुरक्षित हैं।
सफारी में आधा दर्जन शावक ऐसे हैं जिनको जन्म देने के बाद शेरनी ने छोड़ दिया। शेरनी ने उन्हें अपना दूध नहीं पिलाया लेकिन सफारी प्रबंधन ने उन्हें अपनाया। उनके लिए दूध की व्यवस्था की। भोजन भी कराया और यही कारण है कि यह शावक अब बड़े होकर उछल-कूद कर रहे हैं । अन्य शावकों की तरह ही इनका भी रहन-सहन है। अभी सबसे छोटी मादा शावक कृपा है जो एक साल की हो गई है। इसको शेरनी रूपा ने छोड़ दिया था लेकिन सफारी प्रबंधन ने इसकी देखरेख की और अब कृपा उछल कूद करने लगी है।इटावा सफारी पार्क के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल बताते हैं कि इटावा लायन सफारी में एशियाई शेरों का काफी बेहतर ढंग से संरक्षण किया जाता है इसके नतीजे में एशियाई शेरों की संख्या में खासा इजाफा हो रहा है।